उत्तर प्रदेश

योगी का ट्रैक रिकॉर्ड और यूपी में उनकी पुलिस की सख़्ती

राज्य भर में अब तक कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें कुछ ऐसे लोग कई दिनों तक जेल में पड़े रहे, जिनका न तो इन प्रदर्शनों से कोई लेना-देना था और न ही हिंसा भड़काने से. हिंसा करने वालों से सख़्ती से निपटने के बयान बार-बार जारी किए गए. लेकिन इस बात पर कई सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या प्रदर्शन करना भी हिंसा की श्रेणी में आता है?

कुछ दिन पहले जेल से रिहा हुए रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी कहते हैं, “प्रदर्शन करना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है. आप हिंसा करने वालों की पहचान करिए और उन्हें क़ानून के तहत दंड दीजिए. लेकिन प्रदर्शन की अपील करने वालों को भी आप हिंसा भड़काने के आरोप में अपराधियों की तरह गिरफ़्तार करके जेल में डाल देंगे, यह ठीक नहीं है.

एसआर दारापुरी को 19 दिसंबर की शाम को उनके घर से गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया था.

हालांकि उन्हें एक दिन पहले ही कथित तौर पर नज़रबंद कर दिया गया था लेकिन प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था.

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