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World Radio Day 2020 : झारखंड के झुमरीतिलैया से अब नहीं होती गीतों की फरमाइश.

[: World Radio Day 2020 : ‘कोई हसीना जब रूठ जाती है तो और भी हसीन हो जाती है….’। फिल्म शोले के इस गीत की फरमाइश की है झुमरीतिलैया से अमर, गुड्डूर्, रिंकी और कमल ने। रेडियो शिलांग, रेडियो नेपाल और विविध भारती पर प्रसारित होने वाले फरमाइशी गीतों को सुनकर बड़ी हुई पीढ़ी को झुमरीतिलैया जरूर याद होगा। रेडियो का कोई ऐसा शो नहीं होगा, कोई ऐसा दिन नहीं होगा जिस पर झुमरीतिलैया से गीतों की फरमाइश नहीं आती हो। अपने इस अनूठे शौक के कारण झारखंड का यह कस्बाई नगर पूरे देश में मशहूर हुआ।

आलम यह था कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी यह पूछा जाने लगा कि देश में सबसे ज्यादा रेडियो पर गीतों की फरमाइश कहां से आती है? एक से एक रेडियो के शौकीन थे यहां। जिस गली से गुजरें गीतों पर कान लगाए लोग मिल जाते थे। लेकिन स्मार्ट फोन और केबल टीवी के जमाने में नई पीढ़ी के शहर में अब रेडियो पर नगमे कहीं नहीं गूंजते। भौगोलिक नक्शे पर भले यह शहर माइका खनन के लिए विश्वप्रसिद्ध है लेकिन असली पहचान इसे यहां के श्रोताओं ने ही दी।
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