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कौन हैं आजसू पार्टी के सुदेश महतो जिनके सामने भाजपा ने अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारा

रांची/नई दिल्ली: झारखंड में 2014 से लेकर 2019 तक भाजपा के मुख्यमंत्री रघुबर दास शासन करने में सफल रहे. 81 विधानसभा सीटों में भाजपा को 37 सीटें ही मिली थीं लेकिन आजसू यानी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन की 5 सीटों की मदद ने भाजपा की सरकार चला दी. झारखंड में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई सरकार पांच साल तक चल पाई पर 2019 के चुनाव में भाजपा और आजसू के बीच सीटों के वितरण को लेकर सहमति नहीं बनी और अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं.

इस संदर्भ में आजसू के मुख्य प्रवक्ता देव शरण भगत बताते हैं, ‘इसमें छात्रों और युवाओं की एनर्जी व बुद्धिजीवियों का दिमाग लगा है, इसलिए आज भी ये पार्टी स्टूडेंट यूनियन की तरह ऊर्जा से काम करती है. रही बात अलग चुनाव लड़ने की तो आजसू अब बच्चा नहीं रहा जिसे चलने के लिए सहारे जरूरत हो.’

एक अलग राज्य झारखंड के निर्माण के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा लंबे समय से प्रयास कर रहा था लेकिन वांछित सफलता नहीं मिल रही थी. 1977 में केन्द्र और बिहार दोनों में जनता पार्टी की सरकार आने के बाद भी झारखंड को प्रदेश के तौर पर जगह नहीं मिल रही थी. इस संदर्भ में 1986 का साल झारखंड के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल झारखंड के छात्रों ने आंदोलन में खुलकर हिस्सा लेना शुरू किया और ऑल इंडिया झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन बना लिया, जिसका एकमात्र उद्देश्य था झारखंड राज्य का निर्माण.

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