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35 साल के छेत्री के अलावा हमारे पास दूसरा बड़ा स्ट्राइकर नहीं, पिछले साल 50% गोल अकेले किए

भारत की मेजबानी में नवंबर में अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप के मुकाबले होने हैं। दुनिया की 16 टीमें इसमें शामिल होंगी। 2017 में अंडर-17 पुरुष वर्ल्ड कप के भी मुकाबले हमारे यहां हुए थे। इससे उम्मीद थी कि 130 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले देश में फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी देखने को मिलेंगे। लेकिन सीनियर पुरुष टीम के रिकॉर्ड अच्छे नहीं रहे। टीम ने 2019 में 13 मैच खेले, सात में हार मिली, दो जीते, जबकि 4 मुकाबले ड्रॉ रहे। टीम ने 14 गोल किए। इसमें से 7 यानी 50% गोल स्ट्राइकर सुनील छेत्री ने किए। अन्य 6 खिलाड़ियों ने मिलकर 7 गोल किए।

2011 में बाईचुंग भूटिया के रिटायर होने के बाद टीम के पास दूसरा बड़ा स्ट्राइकर नहीं है। आई-लीग और इंडियन सुपर लीग जैसे टूर्नामेंट के बाद भी हमें अब तक अच्छे स्ट्राइकर नहीं मिल सके हैं। भारतीय टीम वर्ल्ड कप के पांच क्वालिफाइंग मुकाबलों में एक भी नहीं जीत सकी है। 5 मैच में से टीम ने 3 मैच ड्रॉ खेले हैं, 2 में हार मिली। छेत्री 35 साल के हो चुके हैं। ऐसे में टीम को इंटरनेशनल लेवल पर प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए अच्छे युवा स्ट्राइकर की जरूरत है।

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