पॉलिटिक्स

नागरिकता क़ानून के विरोध में यूएन, अमेरिका में आवाज़ें उठीं, बांग्लादेश भी नाराज़

केंद्र सरकार के नागरिकता क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका तक में विरोध की आवाज़ें उठ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार मामलों की संस्था और अमेरिका ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वो संविधान के दायरे में रहकर सभी अल्पसंख्यकों के अधिकार बरक़रार रखे.

केंद्र सरकार के विवादित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध तेज़ हो गया है. मानवाधिकार मामलों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएचसीआर ने नागरिकता क़ानून पर चिंता ज़ाहिर की है. यूएनएचसीआर ने कहा, ‘हम भारत के नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर चिंतित हैं जिसकी प्रकृति मूलरूप से भेदभाव करने वाली है. पीड़ित समुदायों की सुरक्षा देने वाला यह क़ानून स्वागत के लायक़ है लेकिन यह क़ानून मुसलमानों को सुरक्षा नहीं देता.’

नागरिकता क़ानून पर अमेरिका ने कहा, ‘नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जारी हलचल की हम बारीक़ी से निगरानी कर रहे हैं. हमारी मांग है कि भारत संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए धार्मिक अल्पसंख्यों के अधिकारों की रक्षा करे.’

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले अमेरिकी आयोग के राजदूत सैम ब्राउनबैक ने ट्वीट किया, ‘भारत की महान शक्तियों में से एक उसका संविधान है. लोकतंत्र का साथी होने के नाते हम भारत के संस्थानों का सम्मान करते हैं लेकिन नागरिकता संशोधन बिल की जटिलताओं को लेकर फिक्रमंद हैं. हम उम्मीद करते हैं कि भारत धार्मिक स्वतंत्रता समेत अपने संविधान की प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा.’

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