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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नीरव के खिलाफ याचिका दायर की थी।

मुंबई. पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी (48) को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट ने गुरुवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नीरव के खिलाफ याचिका दायर की थी। भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत नीरव देश का दूसरा भगोड़ा घोषित हुआ है। जनवरी में पीएमएलए कोर्ट ने शराब कारोबारी विजय माल्या को भगोड़ा घोषित किया था।

नीरव 9 महीने से लंदन की जेल में है

13700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले का आरोपी नीरव लंदन की वांड्सवर्थ जेल में है। भारत की अपील पर प्रत्यर्पण वारंट जारी होने के बाद लंदन पुलिस ने 19 मार्च को उसे गिरफ्तार किया था। उसकी जमानत अर्जी 5 बार खारिज हो चुकी। भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटी हैं।

क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून ?

वित्तीय घोटाला कर रकम चुकाने से इनकार करने वालों पर इस कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 

आर्थिक अपराध में जिनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो उन पर कार्रवाई का प्रावधान है। 

100 करोड़ रुपए से ज्यादा के ऐसे लोन डिफॉल्टर्स जो विदेश भाग चुके हैं, उन पर कार्रवाई की जा सकती है। 

भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्तियां बेचकर भी कर्ज देने वालों की भरपाई का प्रावधान है। 

कानून के मुताबिक, किसी आरोपी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए संबंधित एजेंसी को विशेष अदालत में याचिका देनी होती है। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूतों के साथ उसके पते-ठिकानों और संपत्तियों का ब्यौरा भी शामिल होता है। 

जब्त किए जाने योग्य बेनामी संपत्तियों और विदेशी संपत्तियों की सूची भी देनी पड़ती है। साथ ही उसमें संपत्तियों से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी भी शामिल होती है। 

आवेदन मिलने के बाद स्पेशल कोर्ट आरोपी को 6 हफ्ते के अंदर पेश होने के लिए नोटिस भी जारी करता है।

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