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सीएए पर बोलीं सीतारमण-छह साल में 3924 शरणार्थियों को दी नागरिकता, अदनान सामी तस्लीमा हैं उदाहरण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून का मकसद लोगों की जिंदगियों को बेहतर बनाना है। इस कानून से किसी की नागरिकता को छीनी नहीं जा रही है बल्कि नागरिकता दी जा रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान से आए लोग देश के विभिन्न शिविरों में बस गए, वे अब भी वहां हैं। अब 50-60 साल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आप इन शिविरों में जाते हैं, तो आपका दिल रो जाएगा। श्रीलंका के शरणार्थियों के साथ भी ऐसा ही है जो शिविरों में रह रहे हैं। वे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

सीतारमण ने कहा कि इसलिए यह संशोधन (नागरिकता संशोधन अधिनियम) लोगों को बेहतर जीवन प्रदान करने का एक प्रयास है। हम किसी की नागरिकता नहीं छीन रहे हैं, हम केवल उन्हें प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष में 2838 पाकिस्तानी शरणार्थियों, 948 अफगानी शरणार्थियों, 172 बांग्लादेशी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी गई है, जिनमें मुस्लिम भी शामिल है। 1964 से 2008 तक 4,00,000 से अधिक तमिलों (श्रीलंका से) को भारतीय नागरिकता दी गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि साल 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 566 मुस्लिमों को भी भारत की नागरिकता दी गई है। 

वित्त मंत्री ने कहा कि 391 अफगान मुस्लिम और 1595 पाकिस्तानी प्रवासियों को 2016 से 2018 तक नागरिकता दी गई। 2016 में इस अवधि के दौरान, अदनान सामी को नागरिकता दी गई थी, यह एक उदाहरण है। तस्लीमा नसरीन इसका एक और उदाहरण हैं। इससे हमारे ऊपर लगे सभी आरोप गलत साबित होते हैं।

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