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फिर BJP के साथ जा रही है शिवसेना?

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम के तकरीबन तीन सप्ताह बाद भी महाराष्ट्र की राजनीति ऊहापोह थमने का नाम नहीं ले रहा, एक तरफ जहां शिवसेना बीजेपी का दामन छोड़ एनसीपी और कांग्रेस की तरफ ललचायी आंखों से देख रहीं है तो वहीं एनसीपी और कांग्रेस, शिवसेना की लालच का फायदा उठाते हुए उसे अपने इशारों पर नचा रहीं है, और शिवसेना भी नाचने को मजबूर है, क्योंकि उसे प्यारी है वो कुर्सी जिसके लिए उसने अपने 35 साल पुराने दोस्त से नाता तोड़ा, जो अपने अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सकीं, हम बात कर रहें है बीजेपी की जिसे 2019 विधानसभा चुनाव में मात्र 105 सीटें ही हासिल हुई, जबकि शिवसेना को 56, एनसीपी को 44 और कांग्रेस को 54 सीटें प्राप्त हुए।

लेकिन महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भी बीजेपी महाराष्ट्र में अपना सरकार बनाने में नाकामयाब रहीं, क्योंकि उसके सहयोगी दल ने उससे किनारा कर लिया, और खुद को कुर्सी के प्रति समर्पित कर दिया, जिसके लिए उसने अपने विचारधारा के विरूद्ध दूसरे पार्टियों से भी गठजोड़ करने की कोशिश की, लेकिन यह जोड़ नहीं जुड़ पा रहा है, जिसे देख अब शिवसेना की सेना भी मुखर हो गई है और कह रहीं है कि शिवसेना को इंतजार करना चाहिए और एनसीपी सुप्रीमो के साथ जाने से पहले 1द बार विचार करना चाहिए।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर एनसीपी और कांग्रेस के बीच 18 अक्टूबर को बैठक हुई लेकिन जब इस बैठक के बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी और कांग्रेस की इस बारे में कोई विशेष बात नहीं हुई है, हालांकि उन्होंने उसके बाद एक ट्वीट भी किया और कहा कि, नई दिल्ली में आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीजी से भेंट कर महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में चर्चा की। आनेवाले समय में महाराष्ट्र की राजनीतिक गतिविधियों पर हमारी नज़र रहेगी। महागठबंधन के मित्र पक्षों को विश्वास में लेकर हम निर्णय करेंगे।

हालांकि पवार के इस ट्विट के बाद भी शिवसेना की सेना संतुष्ट नहीं दिख रहीं और उन्होंने शिवसेना प्रमुख से यह गुजारिश की है कि वे एकबार फिर बीजेपी का दामन थामे, उन्होंने कहा कि पार्टी को कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन नहीं करना चाहिए और अगर बीजेपी के साथ उसके रिश्ते सहज़ नहीं है तो उसे अकेले चलना चाहिए। आपको बता दें कि इन दोनों महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन है, जो 6 माह तक रहेगा, जिसके बाद एकबार फिर महाराष्ट्र की जनता को अपना प्रतिनिधि चुनना होगा। लेकिन बीजेपी, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की यह कोशिश होगी की वे दुबारा चुनाव होने के संभावना से पहले अपनी सरकार बना लें।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के सत्ता में आने के लिए किसी भी दो या दो से अधिक पार्टियों का गठबंधन होना जरूरी है, जिससे वे बहुमते के आंकड़े को छू सकें, अब देखना यह है कि एनसीपी और कांग्रेस के इस ताना बाना में शिवसेना कैसे अपना रास्ता निकालती है, क्या उसे अपने इस रास्त के लिए राष्ट्रपति शासन खत्म होने का इंतजार करना होगा या उसे एक बार फिर कमल का दामन थामना होगा। अब देखना यह है कि महाराष्ट्र की जनता को ये सभी प्रमुख पार्टियां क्या सौगात देती है?

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