पॉलिटिक्स

शाह ने संभाली एक और बड़ी ज़िम्मेदारी, नए सिरे से लिखा जाएगा देश का कानून !

इन दिनों देश के गृहमंत्री अमित शाह फुल एक्शन में दिख रहे हैं। पहले अनुच्छेद 370, उसके बाद भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की बात और CAA लागू करने वाले अमित शाह अब ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता यानि आईपीसी में व्यापक सुधार लाने के लिए कदम उठाने वाले हैं।आजतक के ‘एजेंडा आजतक’ के आठवें संस्करण में पत्रकार राहुल कंवल के साथ 90 मिनट लंबी बातचीत में अमित शाह ने नागरिकता कानून पर हो रहे विरोध प्रदर्शन से लेकर कुलदीप सेंगर मामले तक पर जवाब दिया। लेकिन इस दौरान जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही वो था उनका आगे का रोड मैप कि अब आगे क्या करना है।

जब राहुल कंवल ने यह सवाल किया कि आगे क्या करना है, इस पर गृह मंत्री ने कहा कि गृह विभाग को अभी सीआरपीसी और आईपीसी का अमेंडमेंट करना है। देश की सीमाओं को सुरक्षित करना है। यही नहीं उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के अंदर मूलभूत परिवर्तन करने हैं। ढेर सारी समस्याएं हैं और इनसे निपटने के साथ-साथ देश को आगे बढ़ाना है। उन्होंने आगे कहा देश को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर ले जाना है। उन्होंने बताया कि दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाना है, दुनिया के शीर्ष तीन देशों में भारत को शामिल कराना है। अपने सटीक उत्तर से अमित शाह ने यह क्लियर कर दिया कि अभी शांत होने का कोई मतलब नहीं है और अभी बहुत सारे सुधार करना है।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2014 से 2019 तक हमने हर घर में गैस, शौचालय और बिजली पहुंचाई, अब 2024 तक हरेक के घर में पानी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अभी ढेर सारी चीजें हैं करने को, क्योंकि 70 साल तक किसी ने कुछ किया ही नहीं है। राम मंदिर के निर्माण पर अमित शाह ने कहा कि चार महीने में आसमान को छूने वाले राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमें मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। हम तीन माह के अंदर यह प्रक्रिया पूरी कर देंगे और चार माह में मंदिर निर्माण की शुरुआत होगी।

इन सभी समस्याओं में से सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है IPC और CRPC में बदलाव। अमित शाह कई मौकों पर यह बयान दे चुके हैं कि IPC में बदलाव जरूरी है। और इस दिशा में कदम भी उठाए गए हैं। इससे पहले पीआर एंड डी (पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो) के 49वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में गृहमंत्री अमित शाह ने इस बात के संकेत दिए थे। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीआरपीसी और आईपीसी के अंदर जरूरी बदलाव के लिए देशभर में एक परामर्श प्रक्रिया शुरु करने की आवश्यकता है।

इसी संबंध में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर आईपीसी एवं सीआरपीसी में व्यापक सुधार हेतु सुझाव मांगे गए हैं। यही नहीं, गृह मंत्रालय द्वारा न्यायिक विशेषज्ञों की दो कमेटी की स्थापना भी हुई है। मीडिया से बातचीत के दौरान गृह मंत्रालय से संबन्धित सूत्रों ने बताया था, “इस व्यापक बदलाव के पीछे का ध्येय है कि आईपीसी में स्वामी और दास की परंपरा खत्म हो। इस संबंध में आपीसी में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ब्रिटिश राज में बने आईपीसी-सीआरपीसी की कई धाराएं अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। अंग्रेज़ों के समय बनाए गये आईपीसी का किस तरह दुरुपयोग किया गया है, ये आप धारा 295ए के दुरुपयोग से देख सकते हैं। 1927 में पारित हुई इस धारा के अनुसार ईश निंदा हेतु किसी धार्मिक आस्था का अपमान करना एक दंडनीय अपराध घोषित कर दिया था। उदाहरण के लिए दिवंगत नेता कमलेश तिवारी को ही ले लीजिये। उन्हें जेल में सिर्फ इसलिए डाला गया था क्योंकि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के विरुद्ध आपत्तिजनक बयान दिये थे। ब्रिटिश कालीन आईपीसी में इसीलिए व्यापक सुधार अत्यंत आवश्यक है। और अमित शाह के वर्तमान बयान यदि इस बात के सूचक हैं, तो यह निस्संदेह इस दिशा में एक सराहनीय और सार्थक प्रयास है।

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