पॉलिटिक्स

ऐसे वीर थे सावरकर, अंग्रेजों से लेते थे हर महीने 1.30 लाख रुपए की पेंशन

“माफी क्यों मांगूं, मैं राहुल गांधी हूं राहुल सावरकर नहीं” गत दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में एक रैली के दौरान मंच से कहे गए इस तरह के शब्दों ने देश की राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया है। दरअसल, राहुल गांधी के इन शब्दों ने जनता को वह घटना याद दिला दी है जिसके अनुसार कहा जाता है कि जिन सावरकर जी को वीर बताया जाता है, उन्हें जब स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सजा हुई थी, तो उन्होंने अंग्रेज हुकूमत से माफी मांग ली थी।

बात कड़वी है, असर दिखना स्वाभाविक था। दिॆख भी रहा है। भगवाधारी सावरकर के महिमा मंडन में लग चुके हैं। भाजपा को तो बुरा लगा ही, शिवसेना को भी अच्छा नहीं लगा। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे मजबूरी में बोल नहीं पा रहे, सरकार बनाए रखने के लिए उन्हेॆ कांग्रेस की दया की जरूरत जो है।

खबर है कि, इस बयान के चलते सावरकर के पोते रंजीत सावरकर राहुल गांधी पर मानहानि का मामला दर्ज कराना चाहते हैं। क्या ऐसा करने से इतिहास का नह पन्ना हट जावेगा जिसके अनुसार सावरकर वीर नहीं क्षमा याची कहलाते हैं? यह तो वही बता सकते हैं।

इसी बीच फेसबुक पर भिंड निवासी प्रख्यात कलमकार ए. असफल की एक तथ्यात्मक पोस्ट पढ़ने को मिली, जो सावरकर की “वीरता” और आंदोलन में उनके “योगदान” को दर्शाती है। श्री असफल जी की फेसबुक वॉल से वह पोस्ट हम यथावत आपकी जानकारी के लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। –सम्पादक

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