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रिलायंस ने रिफाइनिंग-पेट्रोकेमिकल्स बिजनेस के 20% शेयर 1 लाख करोड़ रु में अरामको को बेचने की डील की।

मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के रिफाइनिंग-पेट्रोकेमिकल्स कारोबार में 20% हिस्सा बिक्री की योजना बाधित हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को रिलायंस और ब्रिटिश गैस से संपत्तियों की जानकारी देने को कहा। केंद्र सरकार ने सितंबर में अर्जी दायर कर दोनों कंपनियों को एसेट्स बेचने से रोकने की मांग की थी। अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी। सरकार पन्ना-मुक्ता और ताप्ती (पीएमटी) फील्ड में रिलायंस और ब्रिटिश गैस से उत्पादन साझेदारी विवाद में इन कंपनियों से 4.5 अरब डॉलर (30,000 करोड़ रुपए) के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड की रकम पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है। 1994 में हुआ यह कॉन्ट्रैक्ट अब खत्म हो चुका है।

रिलायंस की मार्च 2021 तक कर्ज मुक्त होने की योजना


1.रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 12 अगस्त को बताया था कि रिफाइनिंग-पेट्रोकेमिकल्स बिजनेस की 20% हिस्सेदारी 15 अरब डॉलर (1 लाख करोड़ रुपए) में सऊदी अरामको को बेची जाएगी। रिलायंस ने 18 महीने में कर्ज मुक्त होने की योजना के तहत यह डील की है।

2.सरकार की ओर के कोर्ट में दलील रखी गई कि रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 2.88 लाख करोड़ रुपए का भारी भरकम कर्ज है। कर्ज चुकाने के लिए कंपनी संपत्तियों की बिक्री और ट्रांसफर जैसे रास्ते अपना रही है। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रही तो सरकार को आर्बिट्रेशन अवॉर्ड चुकाने के लिए कुछ नहीं बचेगा। सरकार को रिलायंस की कारोबारी योजना की जानकारी नहीं है।

3.सरकार 2010 से आर्बिट्रेशन अवॉर्ड के लिए लड़ रही है। सरकार के मुताबिक रिलायंस और ब्रिटिश गैस ने प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन कर काफी रकम अपने पास रख ली। 2016 में ट्रिब्यूनल ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया। सरकार ने दोनों पर 3.8 अरब डॉलर बकाया होने का आकलन किया था। ब्याज समेत यह रकम 4.5 अरब डॉलर हो चुकी है। रिलायंस और ब्रिटिश गैस से रकम नहीं मिलने की वजह से सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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