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पिता की मौत के बाद सुनील छोड़ना चाहते थे पहलवानी, मां ने हौसला बढ़ाया; अब 27 साल बाद देश को गोल्ड दिलाया

दिल्ली में खेली गई एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप के ग्रीको रोमन कैटेगरी में 27 साल बाद देश को गोल्ड मेडल जिताने वाले अंतरराष्ट्रीय पहलवान सुनील कुमार ने देश के लिए इतिहास रचा है। इससे पहले 1993 में एशियाई चैम्पियनशिप में पप्पू यादव ने भारत के लिए ग्रीकाे राेमन में गोल्ड मेडल दिलाया था। इसके बाद देश के पहलवान गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए। 27 साल बाद देश को गोल्ड मेडल दिलाकर चर्चाओं में आए सोनीपत जिले के डबरपुर गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय पहलवान सुनील कुमार इस मुकाम तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं रहा।

उन्होंने तीन साल जींद जिले के निडानी व रोहतक शहर में संचालित मेहर सिंह अखाड़ा में वरिष्ठ कुश्ती कोच रणबीर ढाका के निर्देशन में सुबह और शाम कड़ी मेहनत कर इस मुकाम को हासिल किया। अब पहलवान सुनील का लक्ष्य 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल लाना है। दिल्ली में हाल ही में हुई चैम्पियनशिप में मेडल जीतकर लौटे पहलवान सुनील कुमार ने दैनिक भास्कर से अपने खेल कॅरियर के दौरान किए गए संघर्ष और जुनून की कहानी साझा की।

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