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Tax Savings के नए तरीकों को मौजूदा कानूनों से नहीं मिल रही कोई मदद, सुधार की है जरूरत

भारतीय बचतकर्ता और निवेशक टैक्स बचाने के नए तौर-तरीके अपना रहे हैं। मैं पहले भी लिख चुका हूं कि अब व्यक्तिगत निवेशक हर माह 8,000 करोड़ रुपये से अधिक रकम एसआइपी में निवेश कर रहे हैं। ताजा निवेश का यह प्रवाह काफी स्थिर है और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) एवं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की रकम को भी जोड़ लें तो यह भारतीय इक्विटी मार्केट का मजबूत आधार बन गया है।

निवेशक जहां महंगाई दर से अधिक रिटर्न देने वाले और लंबी अवधि के निवेश की नई दुनिया की ओर जा रहे हैं, वहीं कैपिटल गेन्स टैक्स को लेकर हमारा कानून अब भी पुरानी सोच में उलझा हुआ है। भारत में इक्विटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स का स्ट्रक्चर बढ़ती अर्थव्यवस्था के बजाए काफी हद करीब पांच दशक पहले के अमीर विरोधी विचार पर खड़ा है। इसके अलावा यह ऐसे निवेशकों के हितों के खिलाफ काम कर रहा है जो अपने रिटर्न को बढ़ाना चाहते हैं और बड़ी रकम जुटाना चाहते हैं।

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