पॉलिटिक्स

हरियाणा की राजनीति में नए साल में बन सकते हैं नए समीकरण

बहादुरगढ़: नए साल में हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण बनने के आसार नजर आने लगे हैं। जननायक जनता पार्टी के विधायक रामकुमार गौतम ने इसकी शुरुआत भी लगभग कर दी है। भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली से सत्तापक्ष के विधायकों में भी बेचौनी हो रही है। कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य और पूर्व सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सत्तापक्ष के विधायकों में छटपटाहट बढ़ रही है। छटपटाहट इसलिए कि उन्होंने वोट तो भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए लिया था। लेकिन अपने निजी स्वार्थ के चलते सरकार भाजपा की बनवा दी। दीपेन्द्र हुडा ने कहा कि उनकी सहानुभूति विधायकों के साथ है।

जननायक जनता पार्टी से आए बगावती सुरों से साल 2020 में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टवैन्टी टवैन्टी मैच होने की संभावनाएं भी बढ़ गई है। दीपेन्द्र हुडा ने हालांकि खुलतौर पर ये नही कहा कि वो सत्तापक्ष के नाराज विधायकों के संपर्क में हैं और नए राजनीतिक समीकरणों की तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन वो कहते हैं कि उनकी सहानुभूति उन विधायकों के साथ है जो ये मानकर छटपटा रहे हैं कि ये सरकार जनभावनाओं के खिलाफ है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जेजेपी और बीजेपी की सरकार अब तक अपना कॉमन मीनिमय प्रोग्राम भी तय नहीं कर पाई है। दीपेन्द्र ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के वोटों में सिर्फ 4200 वोटों का फर्क है। इस बार विपक्ष ताकतवर है और वो सरकार को जनभावनाओं के खिलाफ काम भी नही करने देंगे। दीपेन्द्र हुडा बहादुरगढ़ के विधायक राजेन्द्र जून की जीत पर कार्यकत्र्ताओं का धन्यवाद करने के लिऐ आए थे।

उन्होंने कहा कि जनता ने उनकी हार उतार दी है। दीपेन्द्र हुडा ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार एनआरसी, सीएए और एनपीआर जैसी चीजें इसलिये कर रही है ताकि लोगों का ध्यान अर्थव्यवस्था की मंदी, महंगाई , बेरोजगारी और कृषि संकट से हटा सके लेकिन कांग्रेस ऐसा होने नही देगी और जनहित के मुद्धो पर सरकार को लाकर ही रहेगी। लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद चेहरे पर जो निराशा और हताशा के भाव दीपेन्द्र हुडा के चेहरे पर नजर आते थे वो भाव अब खुशियों और चमक में बदल चुके हैं। विधानसभा चुनावों में मिले समर्थन ने उन्हे ताकत दी और अब सत्तापक्ष के विधायकों की छटपटाहट से उनकी उम्मीदों को पंख और मिल गये हैं। उम्मीदें ये भी जवां होने लगी है कि नाराज विधायक अब उनके साथ आकर खड़े होंगे ताकि जनभावनाओं की सरकार वो दे सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button