पीएम मोदी और चिनफिंग के बीच आज सीमा विवाद समेत अहम उलझे मुद्दों पर होगी वार्ता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच शनिवार को होने वाली दूसरी अनौपचारिक वार्ता के नतीजे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से शुभ रहने के संकेत हैं। चेन्नई से तकरीबन 57 किलोमीटर दूर भारत-चीन के पुराने रिश्तों का गवाह रहे मामल्लपुरम यानी महाबलीपुरम में दोनों नेताओं की शुक्रवार को हुई गर्मजोशी भरी मुलाकात ने कश्मीर की वजह से द्विपक्षीय रिश्तों में घुले तनाव को काफी हद तक कम कर दिया है। शुक्रवार को सिर्फ घरेलू द्विपक्षीय रिश्तों, कारोबार, आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और निवेश संबंधों पर बात हुई।

आज अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और सीमा विवाद पर होगी वार्ता

शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और सीमा विवाद समेत अन्य उलझे मुद्दों पर बातचीत होगी। माना जा रहा है कि दोनों देशों की तरफ से शनिवार को द्विपक्षीय वार्ता के बाद सीमा पर विश्वास बहाली के लिए कुछ ठोस उपायों की घोषणा की जा सकती है।

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रात्रिभोज ढाई घंटे तक चला

देर रात विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि पांच घंटे तक दोनों नेता साथ रहे जिसमें अधिकांश समय उनके साथ वार्ता में कोई और नहीं था। रात्रिभोज के लिए एक घंटे का समय रखा गया था, लेकिन यह पूरे ढाई घंटे चला।

चिनफिंग अगले साढ़े चार साल मोदी के साथ काम करने के इच्छुक

मोदी और चिनफिंग ने एक दूसरे को अपनी-अपनी सरकारों की प्राथमिकताओं के बारे में भी बताया। राष्ट्रपति चिनफिंग ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अगले साढ़े चार साल बेहद करीबी संबंध रखते हुए काम करने की इच्छा जताई।

कारोबार, आतंकवाद और धार्मिक कट्टरता रही चर्चा का मुख्य केंद्र

बातचीत में आर्थिक मुद्दों पर खासा समय दिया गया। खास तौर पर निवेश बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को दूर करने के उपायों पर दोनों नेताओं ने कई तरह के विकल्पों को खंगाला। आतंकवाद एक दूसरा अहम मुद्दा रहा जिस पर दोनों नेताओं ने समान तौर पर चिंता जताई। खास तौर पर समाज में बढ़ती कट्टरता को रोकने के लिए दोनों देश भविष्य में सहयोग बढ़ाने को भी तैयार हुए।

मोदी और चिनफिंग के बीच 17 बार वार्ता हो चुकी है

गोखले ने बताया कि द्विपक्षीय स्तर पर मोदी और चिनफिंग के बीच 17 बार वार्ता हो चुकी है जो दोनों नेताओं के बीच बढ़ते भरोसे को व्यक्त करती है। इसके अलावा दो बार अनौपचारिक बातचीत भी हो चुकी है।

चिनफिंग के साथ 100 सदस्यीय टीम

इससे पहले दोपहर दो बजे राष्ट्रपति शी चिनफिंग का विमान चेन्नई एयरपोर्ट पर उतरा। उनके साथ 100 सदस्यीय अधिकारियों का दल भी आया है। चेन्नई से मामल्लपुरम की दूरी राष्ट्रपति ने सड़क मार्ग से पूरी की जिसके सुरक्षा इंतजामात में सुरक्षा बलों के तकरीबन 8000 जवान लगे थे।

तमिल परिधान पहने पीएम मोदी ने चिनफिंग की अगवानी की

एयरपोर्ट पर ही चीन के राष्ट्रपति का पारंपरिक नृत्य से स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया था। बंगाल की खाड़ी की हिलोरे मारती लहरों से महज कुछ सौ मीटर दूर स्थित मंदिर परिसर में पारंपरिक तमिल परिधान पहने प्रधानमंत्री मोदी ने चिनफिंग की अगवानी की। परिसर के तीन मुख्य आकर्षणों को मोदी ने एक गाइड की तरह चीनी राष्ट्रपति को दिखाया। यह दोनों नेताओं के बीच रिश्तों की सहजता को भी दर्शाता है।

दोनों देशों के दलों ने समुद्र किनारे स्थित एक दूसरे मंदिर परिसर में कला-केंद्र की तरफ से तैयार सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लिया। इस दौरान भी मोदी और चिनफिंग की बातचीत लगातार चलती रही। इस परिसर में स्थित कृष्ण के मक्खन की गेंद (बटरबॉल) के नाम से मशहूर पत्थर के पास मोदी और चिनफिंग ने हाथ उठाकर तनाव खत्म करने के संकेत भी दिए। यह पूरा परिसर व‌र्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल है।

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रात्रिभोज में दोनों देशों के आठ-आठ अधिकारी शामिल थे

भारतीय प्रधानमंत्री की तरफ से आयोजित रात्रिभोज में दोनों देशों के विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश सचिव, एक दूसरे के देश में पदस्थ राजदूत समेत आठ-आठ अधिकारी शामिल थे। लेकिन दक्षिण भारतीय खाने का स्वाद लेते हुए भी मोदी और चिनफिंग की बातचीत चलती रही। इस वार्ता को शनिवार को होने वाली द्विपक्षीय आधिकारिक वार्ता की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

पीएम मोदी कश्मीर मुद्दे को चिनफिंग के समक्ष पेश करेंगे

देखना होगा कि शनिवार को कश्मीर मुद्दे पर बात होती है या नहीं। भारतीय पक्ष मानता है कि उसे अपनी बात रखने में कोई दिक्कत नहीं है। मोदी स्वयं चिनफिंग को कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की पूरी कहानी बताना चाहेंगे।

दोनों देशों के बीच कश्मीर मुद्दे पर तल्खी बढ़ी

सनद रहे कि मोदी और चिनफिंग की यह बातचीत तब हो रही है जब दोनों देशों के बीच कश्मीर मुद्दे पर तल्खी बढ़ गई है। तीन दिन पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीजिंग में चिनफिंग से मुलाकात की थी। तब चिनफिंग ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष का समर्थन किया था। इस पर भारत ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

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मोदी ने चिनफिंग को दी अर्जुन के तप के बारे में जानकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाइड की भूमिका निभाते हुए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को धनुर्धारी अर्जुन और उनकी तपस्या के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह मानव और प्रकृति एक दूसरे के साथ सहज भाव से रह सकते हैं। इस बारे में राष्ट्रपति चिनफिंग ने काफी दिलचस्पी भी ली।

चिनफिंग ने मामल्लपुरम पर शोध करवाने की इच्छा जताई

चिनफिंग ने कहा कि वह इस जगह के चीन के साथ जुड़ाव के बारे में जानते हैं और आगे इस बारे में और शोध करवाने की इच्छा रखते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने चीन के फुजियान प्रांत में मिले एक मंदिर के अवशेष की भी चर्चा की। उम्मीद है कि दोनों देश इन ऐतिहासिक संबंधों के बारे में संयुक्त तौर पर और जानकारी हासिल करेंगे।