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जानें- देश की जानीमानी लेखिका ने हैदराबाद एनकाउंटर पर जश्न को क्‍या कहा खतरे की घंटी

: नोएडा [अमित कुमार]। Hyderabad encounter : हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के चारों आरोपितों के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने का एक बड़े तबके ने स्वागत किया। लोगों ने पुलिसकर्मियों पर फूल बरसाए तो महिलाओं ने राखी तक बांध दी। आम आदमी की तो क्या कहें, सांसद, नेता, फिल्मी सितारे और बड़े-बड़े खिलाड़ियों ने भी इसे त्वरित न्याय बताया। और यह तब है जब आरोपितों का अपराध अभी साबित भी नहीं हुआ था। उन्नाव कांड के दोषियों के साथ भी ऐसा ही सलूक किए जाने की मांग उठी। ऐसे में सवाल उठता है कि देश में कोई न्याय व्यवस्था है या नहीं। देश संविधान और कानून के मुताबिक चलेगा या हम भी कट्टरपंथी मुल्कों की तरह व्यवहार करेंगे, जहां आज भी ऐसे अपराध में सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने या मौत की सजा देने का चलन है।

महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के खिलाफ चाहें जितने भी कड़े कानून बना लीजिए, जब तक महिलाओं के प्रति समाज की सोच नहीं बदलेगी, कुछ बदलने वाला नहीं है। सिर्फ कड़े कानून बना देना ही किसी समस्या का समाधान होता तो दिल्ली के निर्भया कांड के बाद महिलाओं पर होने वाले अपराधों में कमी आ जानी चाहिए थी। निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म की सजा को बेहद सख्त कर दिया गया, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध में कोई कमी नहीं आई। जाहिर है खुद महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। एक पुरानी कहावत है, ‘जिस रास्ते से रोज गुजरना हो, वहां ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।’ ‘दुष्कर्म की घटनाओं पर रोक कैसे लगे’ विषय पर सोमवार को आयोजित जागरण विमर्श में उक्त विचार सुप्रसिद्ध लेखिका क्षमा शर्मा ने व्यक्त किए।
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