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JHARKHAND ELECTION RESULTS: आडवाणी के रघुबर मोदी-शाह के होते ही कैसे बदले?

वो कहते हैं कि उन्होंने अटल-आडवाणी की बीजेपी को इंजॉय किया है, लेकिन मोदी-शाह की बीजेपी को उन्होंने डबल इंजॉय किया है.

रघुबर दास 70 के दशक में टाटा स्टील प्लांट के रोलिंग मिल में मज़दूर थे और 21वीं सदी के दूसरे दशक में उसी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

साल 2014 के आख़िर में जब रघुबर दास ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तो उन्होंने कहा था, एक मज़दूर को बीजेपी ही मुख्यमंत्री बना सकती है. मुख्यमंत्री बनने के बाद रघुबर दास को ‘मज़दूर रघुबर दास’ भला क्यों याद नहीं आता.

रघुबर दास के पिता चमन राम भी मज़दूर ही थे. जमशेदपुर के भालुबासा हरिजन हाई स्कूल से दसवीं तक पढ़ाई करने वाले रघुबर दास ने यहीं के को-ऑपरेटिव कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

रघुबर दास के राजनीतिक करियर की शुरुआत ही एक बड़े पेड़ को गिराने से हुई. जमशेदपुर पूर्वी से पहली बार रघुबर दास को 1995 में बीजेपी ने टिकट दिया. यहां से बीजेपी ने अपने स्थानीय दिग्गज नेता दीनानाथ पांडे का टिकट काटकर रघुबर दास को उतारा था.

दीनानाथ पांडे यहां से तीन बार के विधायक थे, लेकिन पार्टी ने इसकी परवाह किए बिना 40 साल के रघुबर दास को उतार दिया. दीनानाथ पांडे भी बाग़ी बनकर रघुबर दास के ख़िलाफ़ निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन हार मिली.

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