पॉलिटिक्स

जदयू का सिक्सर, भाजपा हिट विकेट, तारिक हुए बोल्ड..

कटिहार। सियासी सफर के लिहाज से वर्ष 2019 कटिहार के लिए एक नया इतिहास बन गया। बेशक मोदी लहर के बीच संपन्न लोकसभा चुनाव ने यहां की सियायत को एक नया किनारा दिया। वैसे यह किनारा कितनी पल्वलित रहेगी, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन खासकर लोस चुनाव को लेकर एक नया कोण यहां जरुर तैयार हुआ। पार्टी के लिहाज से बेशक यहां यह कोण पूर्व से रहा है, लेकिन चुनाव ने उसे धार दे दिया।
दरअसल कटिहार भाजपा की परंपरागत सीट रही थी। गत तीन दशक की बात करें तो लोकसभा में यहां दो कोण ही था। एक तरफ पूर्व सांसद व कद्दावर नेता तारिक अनवर रहे तो दूसरी तरह भाजपा। इसमें पूर्व सांसद निखिल चौधरी इसलिए भी अहम रहे कि क्योंकि भाजपा की ओर से तीन-तीन बार तारिक जैसे सियासी खिलाड़ी को यहां मात देने के नायक वही रहे। तारिक अनवर कांग्रेस छोड़ राकांपा में शामिल हुए, लेकिन कद की छाया उनके साथ रही। फिलहाल वे पुन: कांग्रेस में हैं। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं पार्टी के समर्थक वोटर भी अचानक भौचक्क रह गए थे, जब यह सीट लोकसभा चुनाव में जदयू के खाते में चली गई थी। क्योंकि तब तक सियासी हलकों में भी इसकी परिकल्पना नहीं थी। यद्यपि जदयू नेता अब भी यह दावे से परहेज नहीं कर रहे हैं कि यह सीट जदयू के खाते में जानी ही जानी थी। बहरहाल चुनाव के 20 दिन पूर्व तक बस चर्चा यह थी कि तारिक के खिलाफ इस बार भाजपा की ओर से अखाड़े में कौन उतरेगा। इसमें निस्संदेह पहला नाम पूर्व सांसद निखिल कुमार चौधरी का था। तीन जीत का बड़ा आधार उनके साथ था। विधान पार्षद अशोक अग्रवाल जमीनी स्तर पर लगातार पसीना बहाते रहे थे। प्राणपुर के विधायक सह बिहार सरकार के मंत्री बिनोद कुमार सिंह पर दाव आजमाने की चर्चा भी आम थी। सचेतक सह सदर विधायक तारकिशोर प्रसाद को भी इसका मजबूत दावेदार माना जा रहा था। मंत्री व विधायक को लंबी व सफल सियायत का आधार था। निवर्तमान जिलाध्यक्ष मनोज राय भी इन दावेदारों में शामिल थे। सांगठनिक कार्यक्रमों के सफल संचालन ने उन्हें नयी पहचान दी थी। इन तमाम अटकलों के बीच जदयू के खाते में सीट जाते ही एक तेज सुगबुगाहट सियासी हलकों में हुई। भाजपा की नाराजगी का लाभ मिलने की उम्मीद तक तारिक समर्थक करने लगे। इधर जदयू की ओर से दावेदारों के नाम उछलने लगे। पूर्व मंत्री दुलाल चंद गोस्वामी के साथ मेयर विजय सिंह व जदयू जिलाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव का नाम तेजी से उछलने लगा। अंतत: पार्टी ने दुलाल चंद गोस्वामी पर दाव आजमाया और जीत का सेहरा अंतत: दुलाल के सिर बंधा। यह जीत जदयू के लिए कटिहार के परिप्रेक्ष्य में बड़ी सौगात मानी जाती है। इसमें न केवल भाजपा जीतकर भी हार चुकी थी बल्कि तारिक अनवर जैसे कद्?दावर नेता पर जदयू की यह जीत थी। यह केवल दुलाल के लिए ही नहीं जदयू के लिए ही एक नया इतिहास बन गया है। विधायक के रुप में जदयू को यहां जीत तो मिली थी, लेकिन लोकसभा की इस जीत ने पार्टी को यहां नया फलक दिया है। यद्यपि इस जीत व जमीनी आधार का मूल्यांकन जदयू के लिए नयी चुनौती भी है। लेकिन इतना तय है कि इस जीत से विस चुनाव को लेकर एक नयी अपेक्षा की डगर पर पार्टी को बढ़ा दिया है।

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