कमांडो 3 की कहानी में विधुत ने की खुब मेहनत।

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बॉलीवुड डेस्क. कोई कहानी-कंसेप्ट-आइडिया सफल हो जाए तो बॉलीवुड तब तक उसका पीछा नहीं छोड़ता, जब तक उसे पूरा निचोड न लिया जाए। आतंकवाद-देशभक्ति और बहादुरी का फॉर्मूला हरदम हिट रहता है, ऐसे में ‘कमांडो’ इसी विचार-कथा के साथ सामने आई और इस फ्रेंचाइजी की पिछली दोनों रिलीज (‘कमांडो’, ‘कमांडो-2’) हिट भी रहीं। जाहिर है कि तीसरी कड़ी आनी ही थी।

कहानी का नहीं पड़ता खास असर

1.फ़िल्म की स्टोरी लाइन के मुताबिक, एक कमांडो अपनी जांबाजी व समझदारी से 9/11 जैसी आतंकी कार्रवाई को सफल नहीं होने देता। एक्शन फिल्मों से कहानी की खास उम्मीद नहीं की जाती, इसलिए यहां वो नदारद भी है। कहानी के स्तर पर फिल्म में विविधता नहीं दिखती। संवाद और स्पेशल इफेक्ट्स खास असर नहीं छोड़ पाते, पर मार्क हैमिल्टन की सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग चुस्त है।

एक सीन ने बढ़ाया विवाद

2.फिल्म के एक्शन दृश्य जबर्दस्त हैं। एक्शन डायरेक्टर एंडी लॉग, आलन अमीन व रवि वर्मा के निर्देशन में विद्युत जामवाल ने बेहतरीन फुर्ती-चपलता और देह भाषा के जरिए मारधाड़ के दृश्यों को प्रभावी और विश्वसनीय बना दिया है। उनका अभिनय भी पहले से सुधरा है। अदा शर्मा ने विद्युत का साथ अच्छी तरह दिया है। उनका हैदराबादी एक्सेंट मज़ेदार है। कम स्क्रीन स्पेस में अंगिरा का एक्शन चौंकाता है, वहीं विलेन के रूप में गुलशन देवैया ने अपनी भूमिका दमदार तरीके से निभाई है। वे किरदार के मुताबिक, क्रूर दिखते हैं। फिल्म के क्लाइमैक्स में एक सकारात्मक संदेश भी है, जो दिलचस्पी बढ़ाता है। हालांकि ‘कमांडो 3’ के एक दृश्य (पहलवान द्वारा स्कूली छात्रा की स्कर्ट खींचने) की वजह से कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है, जिससे बचा जा सकता था।