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कांग्रेस के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है शोएब इकबाल का जाना?

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) से करीब एक महीने पहले पूर्व विधायक शोएब इकबाल (Shoiab Iqbal) के आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) में शामिल होने को मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस की उस उम्मीद को झटका लगने का संकेत माना जा रहा है, जो उसने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का खुलकर विरोध करते हुए इन सीटों पर मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए लगा रखी है. पुरानी दिल्ली की मटियामहल इलाके से कई बार विधायक रहे इकबाल गुरुवार को कांग्रेस छोड़कर ‘आप’ में शामिल हुए.

कांग्रेस को नहीं है मलाल

दिल्ली कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने इसे पार्टी के लिए झटका मानने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘इकबाल को यह पहले से पता था कि मटियामहल इलाके में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते उन्हें टिकट नहीं मिलने वाला है. ऐसे में उन्होंने पार्टी छोड़ी है. इससे कांग्रेस की संभावना कोई फर्क नहीं पड़ेगा.’’

मुस्लिम समुदाय को पता है कौन है हितैषी

दूसरी तरफ, दिल्ली कांग्रेस के एक वरिष्ठ मुस्लिम नेता ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘निश्चित तौर पर यह झटका है. लेकिन हमारा यह मानना है कि सीएए के मुद्दे पर कांग्रेस ने जिस तरह से खुलकर आवाज उठाई है, उससे मुस्लिम समुदाय को पता चल गया है कि उनके हितों के लिए कौन लड़ रहा है.’’

आप है बीजेपी की बी पार्टी

उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी पार्टी ने सीएए का खुलकर विरोध नहीं किया क्योंकि यह बीजेपी की ‘B पार्टी’ है. आप देखेंगे कि इस चुनाव में इसका असर दिखेगा.’’ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि जामिया मिल्लिया में पुलिस की कार्रवाई, सीएए विरोधी प्रदर्शनों पर पार्टी ने जिस तरह से खुलकर अपनी बात रखी है उसे दिल्ली में मुस्लिम समुदाय के वोटरों का व्यापक समर्थन मिलेगा.

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