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गृह मंत्रालय की इन सलाहों को मान लिया जाता, तो आज जिंदा होतीं उन्नाव और हैदराबाद की बेटियां

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हैदराबाद की बेटी का केस हो या उन्नाव की बेटी का, दोनों ही मामलों में लोगों का गुस्सा उबाल खा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, महिला सुरक्षा के लिए गत वर्षों में दर्जनों एडवाइजरी जारी कर चुका है। अगर समय रहते सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश गृह मंत्रालय की सलाह मान लेते तो उन्नाव और हैदराबाद की बेटियां आज जिंदा होती। गृह मंत्रालय ने इस साल भी आधा दर्जन एडवाइजरी भेजकर मुहिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही थी।
: मंत्रालय ने अपनी सलाह में उन सभी उपायों का भी जिक्र किया था, जिनकी मदद से महिलाओं के साथ होने वाले जघन्य अपराधों को रोका जा सके। प्रमुख बातों में ‘गुड समारिटन’ और ‘जीरो एफआईआर’ करना शामिल था। केंद्रीय गृह मंत्रालय की दर्जनभर सिफारिशों को लागू करने में अधिकांश राज्यों ने अनावश्यक देरी की है।
2015 में जारी की गई थी एडवाइजरी
गृह मंत्रालय के सेंटर-स्टेट डिविजन ने 12 मई 2015 को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासकों को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें दर्जनभर सिफारिशों का जिक्र था। जैसे, ‘गुड समारिटन’ या शिकायतकर्ता को किसी भी तरह से परेशानी न होने देना और सूचना मिलते ही अविलंब जीरो एफआईआर करना, पुलिस बल में महिलाओं की संख्या बढ़ाना, अपराध की संभावना वाले इलाकों में बीट कांस्टेबल की तैनाती, पुलिस हेल्प बूथ, रात के समय पेट्रोलिंग बढ़ाना, मोबाइल पुलिस वैन में महिलाओं की संख्या में वृद्धि, महिलाकर्मी जिस रास्ते से अपने घर या दफ्तर जाती हैं वहां पुलिस गश्त में बढ़ोतरी और खासतौर पर रात के समय उस रूट को पूरी तरह सुरक्षित बनाने जैसी कई बातें मंत्रालय की सिफारिशों में शामिल रही हैं।

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