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सरकार ने नहीं दी राहत, तो बंद हो जाएगी वोडाफोन आइडिया: केएम बिड़ला

: अगर सरकार से कोई राहत नहीं मिली तो देश की अग्रणी दूरसंचार कंपनियों में से एक वोडाफोन आइडिया बंद हो जाएगी। कंपनी के अरबपति चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने शुक्रवार को यह बात कही। सुप्रीम कोर्ट के हाल के आदेश के क्रम में वोडाफोन आइडिया पर लगभग 53,038 हजार करोड़ रुपये के सांविधिक बकायों की देनदारी बनती है।
एक कार्यक्रम के दौरान बिड़ला ने कहा, ‘यदि हमें कुछ मिलने नहीं जा रहा है तो मुझे लगता है कि यह वोडाफोन आइडिया की कहानी का अंत होगा।’ वह 53,038 करोड़ रुपये के बकाये पर सरकार की तरफ से राहत नहीं मिलने पर कंपनी के भविष्य से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे।

मार्केट लीडर भारती एयटेल, वोडाफोन आइडिया और अन्य दूरसंचार कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क सहित बीते 14 साल के ब्याज और जुर्माने के मद में सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करना है। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने सरकार से ब्याज और जुर्माने पर राहत देने की मांग की है, जिससे बकाया घटकर आधा रह जाएगा। इसके साथ ही दोनों कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका भी दायर की है।

हालांकि, बिड़ला ने उम्मीद जाहिर की कि सरकार 4.5 फीसदी के साथ साढ़े छह साल के निचले स्तर पहुंची जीडीपी विकास दर को रफ्तार देने के लिए दूरसंचार क्षेत्र को ही नहीं बल्कि पूरे उद्योग को राहत देने के लिए कदम उठाएगी।

सरकार ने पिछले हफ्ते ही पूर्व में हुई नीलामियों में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के लिए दूरसंचार कंपनियों को भुगतान से दो साल के लिए राहत देने क एलान किया था। इससे उद्योग को कुल 44 हजार करोड़ रुपये की राहत मिली, लेकिन कंपनियां ब्याज पर राहत की भी मांग कर रही हैं।
एजीआर है बड़ा मुद्दा
उन्होंने कहा, ‘वे (सरकार) दूरसंचार को अहम सेक्टर मानते हैं। पूरा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर इसी पर ही टिका है। यह एक रणनीतिक सेक्टर है।’ कुछ विशेष राहत के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘एजीआर बड़ा मुद्दा है। वास्तव में यह मामला अदालत में है। मुझे लगता है कि सरकार इस पर संवाद कर सकती है।’ एजीआर सकल समायोजित राजस्व है, जो दूरसंचार कंपनियों द्वारा चुकाए जाने वाले सांविधिक बकायों का एक हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर दूरसंचार राजस्व को बकायों की गणना के लिए एजीआर में शामिल करने के सरकार के फैसले को सही ठहराया था।

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