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राज्यसभा की 73 सीटों पर इस साल होंगे चुनाव, जानें भाजपा को किन राज्यों में हो सकता है नफा-नुकसान

राज्यसभा में इस साल 69 सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इनमें 18 भाजपा और 17 कांग्रेस के हैं। चार सीटें पहले से रिक्त हैं। ऐसे में इस साल 73 सीटों के लिए चुनाव होंगे। आंकड़ों की पड़ताल से पता चलता है कि भाजपा को उच्च सदन में बहुमत हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, कांग्रेस कुछ सीटें बढ़ा सकती है।

इस साल सबसे पहले मनोनीत सदस्य केटीएस तुलसी अगले महीने 24 फरवरी को रिटायर होंगे। इसके बाद दो और नौ अप्रैल को 15 राज्यों के 51 सदस्य सेवानिवृत्त होंगे। इनमें एनडीए के घटक दलों में 15 भाजपा के, तीन जदयू के व चार अन्नाद्रमुक के हैं। इनके अलावा बीजद के भी दो सदस्य अप्रैल में ही सेवानिवृत्त होंगे। उधर, विपक्षी दलों में केवल कांग्रेस के ही 13 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है।

भाजपा की राह कठिन है
भाजपा को 2018 और 2019 में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव हारने के कारण उच्च सदन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन भाजपा को उत्तर प्रदेश से उम्मीद है जहां इस साल 10 सीटें रिक्त हो रही हैं।

मौजूदा हालात
250 कुल सीटें राज्यसभा में हैं जिनमें 83 भाजपा के पास।
46 सदस्य हैं राज्यसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास।
123 सदस्यों की जरूरत होती है उच्च सदन में बहुमत के लिए।

कांग्रेस को मौका मिलेगा
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड व महाराष्ट्र की सत्ता में आने से कांग्रेस को सीटें बढ़ाने का मौका मिलेगा।

माकपा की सीट पर नजर
तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक को रिक्त हो रही चार और द्रमुक को एक सीट पर कब्जा बरकरार रखने का भरोसा है। दोनों दलों की नजर माकपा की रिक्त हो रही एक सीट (टी के रंगराजन) पर टिकी होगी।

आंध्र प्रदेश : वाईएसआर कांग्रेस का दावा मजबूत
आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस को अपनी रिक्त हो रही दो सीट तथा टीडीपी को एक सीट बचाने का संकट होगा। वहीं पिछले साल विस चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद इन सीटों पर सत्तारूढ़ दल का स्वाभाविक दावा होगा।

पश्चिम बंगाल : तृणमूल को भरोसा
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का बहुमत होने के कारण पार्टी को राज्यसभा में रिक्त हो रही अपनी चारों सीटें बरकरार रखने का भरोसा है जबकि भाजपा, निर्दलीय सदस्य रीताब्रता बनर्जी की सीट वामदलों के पास जाने से रोकने की कोशिश करेगी।

भाजपा के लिए नफा-नुकसान वाले राज्य
महाराष्ट्र : झटका संभव
भाजपा को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्ता से बाहर रहने के कारण राज्यसभा चुनाव में झटका झेलना पड़ेगा। महाराष्ट्र की इस साल रिक्त हो रही सात सीटों में एनडीए के घटकदल आरपीआई के रामदास अठावले और अब विरोधी खेमे में शामिल शिवसेना की एक सीट (राजकुमार धूत) शामिल है। भाजपा की नजर एनसीपी के शरद पवार और माजिद मेमन की सीट तथा कांग्रेस के हुसैन दलवई की सीट पर थी लेकिन अब इन सीटों से भाजपा निराश है।

हरियाणा : भाजपा को लाभ
हरियाणा से खाली हो रही दोनों सीटों पर भाजपा की नजर है। इनमें इनेलो के राम कुमार कश्यप पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बहुमत को देखते हुए भाजपा, कांग्रेस की कुमारी सैलजा की रिक्त हो रही सीट कब्जाने की कोशिश करेगी।

छोटे राज्यों पर भी फोकस
भाजपा हिमाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम की रिक्त हो रही सीटों पर भी नजर रखे हुए है। इनमें हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस की सीट भाजपा के खाते में जाना तय है।

जदयू-बीजद को नुकसान के आसार नहीं
अप्रैल में रिक्त हो रही 52 सीटों में बिहार और ओडिशा की सीटें भी शामिल हैं। इन राज्यों की विधानसभा में दलीय स्थिति को देखते हुए भाजपा, जदयू एवं बीजद को राज्यसभा में अपनी सीटें बरकरार रखने का भरोसा है।

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