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दिल्ली हिंसा में मरने वालों की संख्या 17 पहुंची, हिंसा के बाद विपक्ष के निशाने पर कपिल मिश्रा

दिल्ली के यमुनापार इलाके में भड़की हिंसा अभी तक थमने का नाम नहीं ले रही है. इस हिंसा में 17 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हैं. दिल्ली के यमुनापार इलाके के मौजपुर, जाफराबाद, बाबरपुर और गोकलपुरी क्षेत्र में पिछले दो दिन से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. विपक्ष के साथ-साथ बीजेपी नेता भी कपिल मिश्रा को दिल्ली हिंसा के लिए निशाने पर ले रहे हैं. हिंसा भड़काने लिए कपिल मिश्रा के खिलाफ बकायदा शिकायत भी की गई है.  

दरअसल रविवार को कपिल मिश्रा अपने समर्थकों के साथ मौजपुर चौक की रेड लाइट पर पहुंचे और CAA के समर्थन में धरने पर बैठ गए. कपिल मिश्रा ने कहा था, ‘ये यही चाहते हैं कि दिल्ली में आग लगी रहे. इसीलिए इन्होंने रास्ते बंद किए और इसीलिए ये दंगे जैसा माहौल बना रहे हैं. डीसीपी साहब, आप सबके सामने खड़े हैं. मैं आप सबकी ओर से ये बात कह रहा हूं कि ट्रंप के जाने तक तो हम शांति से जा रहे हैं. लेकिन उसके बाद हम आपकी भी नहीं सुनेंगे अगर रास्ते खाली नहीं हुए तो. ठीक है? कपिल मिश्रा के इस बयान के दूसरे दिन ही हिंसा भड़क गई.

कपिल मिश्रा का विवादों से पुराना नाता है. विधानसभा चुनाव में विवादित बयानों के लिए सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं. अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर उतने हमले किसी और ने नहीं किए जितने कभी उनके साथ खड़े रहने वाले कपिल मिश्रा ने किए हैं. इससे पहले बीजेपी में थे तो उन्होंने नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह तक के खिलाफ जमकर विवादित बयान दिए. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर लिखा था, ‘8 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान का मुकाबला होगा।

2017 में कपिल मिश्रा ने की थी आप से बगावत

मई 2017 में कपिल मिश्रा के तेवरों ने अरविंद केजरीवाल समेत पूरी आम आदमी पार्टी के नेताओं की नींद उड़ा दी थी. गौरतलब है कि कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. कपिल मिश्रा ने एसीबी में भी शिकायत की थी.

कपिल ने इसके साथ ही अपने आरोपों को लेकर लाइ डिटेक्टर टेस्ट करवाने की बात भी कही थी. हालांकि केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के वे आरोप सिद्ध कभी नहीं हो पाए. इसके बाद पहले कपिल को मंत्री पद से हटाया गया फिर बाद में पार्टी से भी बाहर कर दिया गया.

कपिल मिश्रा की मां रही हैं बीजेपी की नेता

आपको बता दें कि कपिल मिश्रा का परिवार पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का है. कपिल का जन्म 13 नवंबर 1980 को हुआ था. कपिल की मां अन्नपूर्णा मिश्रा बीजेपी नेता रही हैं. वे पूर्वी दिल्ली नगर निगम की मेयर भी रह चुकी हैं. उनके पिता का नाम रामेश्वर मिश्रा ‘पंकज’ है, वे समाजवादी सोच वाले नेता रहे हैं. कपिल की सोच थोड़ी अलग थी जिसके चलते उन्होंने शुरुआत से ही बीजेपी और आरएसएस से अपनी दूरी बनाए रखी लेकिन अंत में परिस्थितियां कुछ ऐसी हुईं कि 17 अगस्त 2019 को उन्होंने आखिरकार बीजेपी ज्वाइन ही कर ली.

कपिल मिश्रा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंबेडकर कॉलेज से बीए और फिर सोशल वर्क में एमए की पढ़ाई की है. कपिल अपने पढ़ाई के समय से ही सामाजिक आंदोलन से जुड़ गए थे. कपिल दिल्ली में काम करने वाले ‘यूथ ऑफ जस्टिस’ संगठन के को-फाउंडर भी रहे हैं. कपिल ने कई सामाजिक समस्याओं को लेकर तमाम विरोध प्रदर्शन भी किए हैं.

कॉमनवेल्थ खेलों में डेवलपमेंट के नाम पर हुई धांधलियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले शुरुआती लोगों में भी कपिल मिश्रा का नाम शामिल है. कपिल ने इस मुद्दे पर ‘इट्ज कॉमन वर्सेज वेल्थ’ नाम की एक किताब भी लिखी है. कपिल ने जेसिका लाल मर्डर केस, किसानों की आत्महत्या और यमुना में अतिक्रमण को लेकर कई बार प्रोटेस्ट भी किया था.

जानकारी के मुताबिक कपिल एमनेस्टी इंटरनेशनल और ग्रीनपीस जैसे अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ में भी काम कर चुके हैं. 26 नवंबर 2012 को जब आम आदमी पार्टी का गठन हुआ तो अरविंद केजरीवाल की टीम में कपिल मिश्रा भी शामिल थे. कपिल मिश्रा कुमार विश्वास के करीबी माने जाते हैं.

ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान ने जब कुमार विश्वास का विरोध किया था उस वक्त कपिल मिश्रा अकेले ऐसे आप नेता थे जो कुमार विश्वास के साथ मजबूती से खड़े रहे थे. 2017 में विरोध के बाद कई बार कपिल के बीजेपी ज्वाइन करने की अफवाहें उठती रहीं है जिस तरह कुमार विश्वास को लेकर भी बातें होती रहती हैं. लेकिन कपिल ने कई बार यह बात कही कि वो 2004 से आंदोलन से जुड़े हुए थे और वे कहीं नही जाएंगे बल्कि वहीं रहकर सफाई करेंगे. झाड़ू चलाएंगे. कूड़ा हटाएंगे.

कपिल ने संस्कृत में ली थी विधायक पद की शपथ

2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में करावल नगर विधानसभा से कपिल मिश्रा विधायक बने थे. 23 फरवरी 2015 को शपथ ग्रहण समारोह में कपिल एकमात्र ऐसे विधायक थे जिन्होंने अपनी शपथ संस्कृत में ली थी. केजरीवाल सरकार में मंत्री भी बने थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद मंत्री पद से हटा दिया गया. मिश्रा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दोनों के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया, पर वो इसे साबित नहीं कर सके

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