पॉलिटिक्स

दिल्ली चुनाव: कांग्रेस बढ़ी तो AAP को टेंशन, घटी तो BJP की वापसी पर लगेगा ग्रहण

दिल्ली में 8 फरवरी को वोटिंग, 11 को नतीजे
कांग्रेस प्रदर्शन पर निर्भर करेगी सत्ता की जंग
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भले ही बीजेपी अपने सत्ता के वनवास को खत्म करने की सियासी जंग लड़ रही है तो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी अपने सिंहासन को बचाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रही है. ऐसे में दिल्ली की तीसरी ताकत के तौर पर कांग्रेस हैं, जिसके चुनावी प्रदर्शन पर बहुत कुछ निर्भर करेगा. मौजूदा दौर कांग्रेस भले ही सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने की ताकत नहीं रखती हो, लेकिन राजनीतिक समीकरण बनाने और बिगाड़ने की कूवत रखती है.

कांग्रेस दिल्ली में अपना ग्राफ बढ़ाने में कामयाब रहती है तो केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की टेंशन बढ़ा सकती है. वहीं, अगर कांग्रेस के नतीजे अगर 2015 जैसे ही रहे तो बीजेपी की सत्ता में वापसी के अरमानों पर पानी फिर सकता है. केजरीवाल की राजनीति में दस्तक के बाद दिल्ली में बीजेपी को तभी फायदा मिला है जब कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा है. दिल्ली नगर निगम के चुनाव रहे हों या फिर हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे से साफ समझा जा सकता है.

2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 33 फीसदी वोटों के साथ 31 सीटें जीतकर नंबर एक पर रही. इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 29.5 फीसदी वोट और 28 सीटें मिली थी, जबकि कांग्रेस को 24.6 फीसदी वोटों के साथ महज 8 सीटें ही मिली थीं. इसके बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट 10 फीसदी से नीचे आया और पार्टी से छिटकने वाला वोट आम आदमी पार्टी को मिला. आम आदमी का वोट बढ़कर 54 फीसदी पहुंच गया था और इसका नतीजा रहा कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता पर प्रचंड बहुमत के साथ काबिज होने में कामयाब रहे. वहीं, बीजेपी 32 फीसदी वोट पाकर महज 3 सीटें ही जीत सकी थी.

ऐसे ही 2017 के एमसीडी और 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के देखें तो कांग्रेस का वोट फीसदी बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को सियासी फायदा मिला और आम आदमी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा. कांग्रेस ने दिल्ली में कमबैक करना 2017 के दिल्ली नगर निगम चुनाव से शुरू किया और पार्टी को करीब 21 फीसदी वोट मिले. इसका सियासी असर यह रहा कि विधानसभा चुनाव में आधे से ज्यादा वोट हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी को 26 फीसदी वोट से संतोष करना पड़ा और बीजेपी ने 39 फीसदी वोट हासिल किए.

ऐसा ही कुछ कांग्रेस का प्रदर्शन लोकसभा चुनावों में भी दिखा. कांग्रेस 22.83 फीसदी वोट हासिल दूसरे नंबर की पार्टी बन गई. वहीं, आम आदमी पार्टी को महज 18 फीसदी वोट मिले और बीजेपी 54 फीसदी के वोटों के साथ सभी सात सीटें जीतने में कामयाब रही थी. ऐसे में अगर कांग्रेस का प्रदर्शन इस विधानसभा चुनाव में खराब रहा तो यह चुनाव द्विपक्षीय हो जाएगा और इससे बीजेपी को नुकसान हो सकता है. हालांकि दिल्ली विधानसभा चुनावों में ध्रुवीकरण हुआ तो कांग्रेस को नुकसान झेलना पड़ सकता है. ध्रुवीकरण होने की स्थिति में मतदाता आप और और बीजेपी के बीच बंट सकते हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली के रण में कांग्रेस किसका खेल बनाती है और किसका खेल बिगाड़ती है?

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