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Defence Expo : नौ हजार किलोमीटर की रफ्तार से अचूक बनेगी ब्राम्होस, कई देशों की नजरें इस अचूक अस्त्र पर

: दुनिया के सबसी तेज क्रूज मिसाइल का तमगा हासिल कर चुकी मेक इन इंडिया ब्राम्होस या फिर चंद्रयान व गगन यान। भारतीय तकनीक का लोहा दुनिया जमीन से अतंरिक्ष तक मान रही है। डिफेंस एक्सपो में भारत की सैन्य क्षमताओं का नए आयाम दे रहे वैज्ञानिक और संस्थान अब भविष्य की सेना तैयार करने में लगे हैं जो किसी भी तरह की चुनौती के लिए तैयार रहेगी। मेक इन इंडिया और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक के दम पर तेजस जैसा लड़ाकू विमान बनाने वाले भारत के हथियारों की ओर आज दुनिया के तमाम देशों का बाजार देख रहा है।

सामरिक मोर्चे पर भारत के परंपरागत सहयोगी देश रूस की मदद से तैयार की गयी ब्राम्होस फिलहाल तीन मैक की स्पीड से 290 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकाने को नेस्तानाबूत करने की क्षमता रखती है। ब्राम्होस की खासियत है कि इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान और जमीन आधारित लांचर से छोड़ा जा सकता है। भारत ने अपने सबसे उन्नत लड़ाकू विमान सुखोई को इससे लैस करना शुरू कर दिया है और पहली स्क्वाड्रन तैयार हो गयी है। डिफेंस एक्सपो में दुनिया भर के खरीदारों की नजरें ब्राम्होस पर लगी हैं। शायद यही वजह है रही कि कई विदेशी कंपनियां और सैन्य विशेषज्ञ ब्राम्होस के बारे में जानकारी लेते नजर आए। भारत के इस अचूक अस्त्र को और धार देने की तैयारी है। ब्राम्होस एयरोस्पेस के चीफ जरनल मैनेजर प्रवीण पाठक का कहना है कि इस हाइपर सोनिक बनाने पर तेजी से काम चल रहा है।
दुनिया के सबसी तेज क्रूज मिसाइल का तमगा हासिल कर चुकी मेक इन इंडिया ब्राम्होस या फिर चंद्रयान व गगन यान। भारतीय तकनीक का लोहा दुनिया जमीन से अतंरिक्ष तक मान रही है। डिफेंस एक्सपो में भारत की सैन्य क्षमताओं का नए आयाम दे रहे वैज्ञानिक और संस्थान अब भविष्य की सेना तैयार करने में लगे हैं जो किसी भी तरह की चुनौती के लिए तैयार रहेगी। मेक इन इंडिया और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक के दम पर तेजस जैसा लड़ाकू विमान बनाने वाले भारत के हथियारों की ओर आज दुनिया के तमाम देशों का बाजार देख रहा है।

सामरिक मोर्चे पर भारत के परंपरागत सहयोगी देश रूस की मदद से तैयार की गयी ब्राम्होस फिलहाल तीन मैक की स्पीड से 290 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकाने को नेस्तानाबूत करने की क्षमता रखती है। ब्राम्होस की खासियत है कि इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान और जमीन आधारित लांचर से छोड़ा जा सकता है। भारत ने अपने सबसे उन्नत लड़ाकू विमान सुखोई को इससे लैस करना शुरू कर दिया है और पहली स्क्वाड्रन तैयार हो गयी है। डिफेंस एक्सपो में दुनिया भर के खरीदारों की नजरें ब्राम्होस पर लगी हैं। शायद यही वजह है रही कि कई विदेशी कंपनियां और सैन्य विशेषज्ञ ब्राम्होस के बारे में जानकारी लेते नजर आए। भारत के इस अचूक अस्त्र को और धार देने की तैयारी है। ब्राम्होस एयरोस्पेस के चीफ जरनल मैनेजर प्रवीण पाठक का कहना है कि इस हाइपर सोनिक बनाने पर तेजी से काम चल रहा है।
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