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चीफ जस्टिस बोले- फांसी के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी, दोषी को कभी नहीं लगना चाहिए इसका सिरा खुला रहेगा

फांसी की सजा को कानूनी दांव-पेंच में उलझाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि मृत्युदंड के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी है। दोषी को कभी नहीं लगना चाहिए कि इसका सिरा खुला रहेगा और सजा को चुनौती देने की लड़ाई अंतहीन चलती रहेगी।

फांसी टालने के लिए निर्भया के दोषियों द्वारा कानूनी हथकंडे आजमाने के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बेहद अहम है। यूपी के अमरोहा में 10 महीने के बच्चे समेत 7 लोगों की हत्या करने वाले प्रेमी जोड़े की मृत्युदंड के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट कानून के अनुसार काम करेगा। पीड़ितों को न्याय देना जजों का कर्तव्य है। कोर्ट को दोषियों ही नहीं, पीड़ितों के अधिकार भी देखने चाहिए। निर्भया के गुनहगारों की ओर इशारा कर कोर्ट ने कहा- ‘‘फैसले का सम्मान कर सजा स्वीकार करनी चाहिए। फांसी को अंतहीन मुकदमों में फंसाने की इजाजत नहीं दे सकते।’’ सभी पक्षों की दलीलें सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

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