राष्ट्रीय समाचार

रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक का प्रबंधन अपने हाथ में ले केंद्र सरकार : सुप्रीम कोर्ट

आम्रपाली, जेपी के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने करीब 30 हजार घर खरीदारों के हितों को ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार को कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में लेने को कहा है। साथ ही फोरेंसिक रिपोर्ट में यूनिटेक व उसके निदेशकों द्वारा फ्लैट खरीदारों के हजारों करोड़ रुपये डायवर्ट करने की बात सामने आने के बाद सरकार को प्रवर्तन निदेशालय समेत तमाम एजेंसियों से इस मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। पीठ ने यूनिटेक के निदेशकों चंद्रा बंधुओं को जमानत देने से भी इनकार कर दिया है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को सरकार से यूनिटेक के मौजूदा निदेशकों को निलंबित करने का निर्देश देते हुए स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने के लिए कहा है। पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को केंद्र सरकार की संबंधित अथॉरिटी को इस बारे में कार्रवाई करने के लिए कहा है। पीठ ने फोरेंसिक ऑडिटर की रिपोर्ट में पाया कि यूनिटेक की 74 परियोजनाओं के लिए घर खरीदारों से जो पैसे लिए गए, उसके अधिकांश हिस्से को किसी अन्य उद्देश्य के लिए कहीं और डायवर्ट कर दिया गया। 

29,800 घर खरीदारों ने करीब 14,270 करोड़ रुपये जमा किए थे। साथ ही परियोजनाओं के नाम पर बैंक से लिए लोन में से करीब 40 फीसदी रकम का ही इस्तेमाल परियोजनाओं के लिए हुआ। 60 फीसदी रकम को डायवर्ट कर दिया गया। इस पर पीठ ने सरकार से कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय समेत तमाम एजेंसी को इसकी जांच करने के लिए कहे।

घर खरीदारों के वकील एमएल लाहोटी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के पास भेजने के लिए इच्छुक थी लेकिन हमने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जेपी मामले में हम सब देख चुके हैं कि खरीदारों को कितनी परेशानी हो रही है, लिहाजा इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को ही सुनवाई करनी चाहिए। लाहोटी के इस आग्रह को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button