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CAA: बिहार बंद के दौरान ग़ायब आमिर की मौत के मामले में कई लोग गिरफ़्तार

[ “आमिर रोज़ की तरह सुबह घर से तैयार होकर काम करने के लिए फ़ैक्ट्री गया था लेकिन उस दिन बिहार बंद की घोषणा थी और हर तरफ़ जुलूस निकाले जा रहे थे. फ़ैक्ट्री बंद थी. वह वापस लौट आया और उसी जुलूस में शामिल हो गया जिसमें मोहल्ले के लोग शामिल थे.”
“जुलूस के दौरान कि जो कुछ तस्वीरें और वीडियो मिलें हैं उसमें वह हाथ में तिरंगा थामे दिखता है. वो ही उसकी आख़िरी तस्वीर थी. उसके बाद मिली तो उसकी सड़ी हुई लाश, वो भी 11 दिनों के बाद.”
ये शब्द 18 साल के एक युवक आमिर हंज़ला के बड़े भाई साहिल के हैं जो फुलवारीशरीफ़ के हारुन नगर सेक्टर 3 में रहते हैं.
साहिल के घर में मातम पसरा है. उनका कमाने वाला भाई हिंसा की भेंट चढ़ गया. उस हिंसा की जिससे उसका दूर-दूर तक का वास्ता नहीं था.
साहिल आगे कहते हैं, “उसे क्या पता था कि CAA और NRC क्या होता है. बहुत संकोची और शर्मिले स्वभाव वाला लड़का था. आप उस तस्वीर में देखिए जिसमें उसने हाथों में तिरंगा लिया है. कितना मासूम दिख रहा है उसमें वो! उसे तो बस केवल जुलूस दिखा होगा, उसमें अपने लोग दिखे होंगे, उसने देखा होगा कि देश का झंडा लहराया जा रहा है, सोचा होगा कि घर जाकर क्या करूंगा, जुलूस में टाइमपास कर लेता हूं.”

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