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असम के मुख्यमंत्री का इंटरव्यू: ‘हम आंदोलनकारियों से बातचीत को तैयार’

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बीबीसी के साथ गुरुवार को एक ख़ास बातचीत की, पढ़िए उन्होंने और क्या-कुछ कहा.प्रजातंत्र में हिंसक आंदोलनों का बुरा प्रभाव पड़ता है. प्रजातांत्रिक समाज ऐसे प्रदर्शनों के खिलाफ है, जो शांति भंग करते हैं. अभी शांति बहाल होना असम और यहां के लोगों के लिए आवश्यक है. हम इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा है कि हमारी सरकार असम के लोगों की पहचान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. हमारे बीच कोई भ्रम नहीं होना चाहिए. लेकिन, हमें कुछ समय दें ताकि हम साथ मिलकर इस मामले का शांतिपूर्ण हल निकाल सकें.कुछ लोग मिसइनफ़ॉर्मेशन (ग़लत सूचनाएं) दे रहे हैं. सच्चाई को कभी उजागर नहीं किया गया है. यह सारा आंदोलन लोगों को गुमराह करने की कोशिशों का है. उन्हें सच से कोई मतलब नहीं है. कोई कहता है इतने लोगों को नागरिकता मिल जाएगी. दूसरा कुछ और संख्या बताता है. इस कारण थोड़ी दिक्कतें हैं. नागरिकता कानून में कोई पहली बार संशोधन नहीं हुआ है. पहले की सरकारों ने भी इस कानून में नौ बार संशोधन किया है.इस आंदोलन में सबलोग शामिल नहीं हैं. कानून-व्यवस्था की भी अपनी प्रकिया है. कोई सरकार उससे अलग कैसे हो सकती है. यह शांति व्यवस्था के लिए किया गया है. किसी को परेशान करने के लिए नहीं. लोगों को हमारे साथ सहयोग करना चाहिए.

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