पॉलिटिक्स

नए साल की पार्टी में मजबूत हुआ राव इंद्रजीत सिंह विरोधी मंच, दो नए नेताओं की एंट्री

रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। लजीज व्यंजनों पर नजर डालें तो यह शाही दावत थी, मगर जायकेदार भोजन के साथ राजनीति का तड़का सबकी जुबान पर असर दिखा रहा था। ‘बहन जी’ के रसगुल्ले व गुलाब जामुन इतने करिश्माई थे कि छत्तीस का आंकड़ा रखने वालों की जुबान में भी मिठास घुल रहा था। बुधवार को विधानसभा की पूर्व उपाध्यक्ष रही संतोष यादव के गुरुग्राम स्थित आवास पर यही नजारा था। संतोष यादव के इस लंच में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के विरोधी ऐसे 9 भाजपा नेता एक साथ मौजूद थे, जिनमें से अधिकांश के पदनाम के साथ अब पूर्व लगा हुआ है।
बहाना नववर्ष का था, परंतु लंच या डिनर की पटकथा पहले ही तय हो चुकी थी। पिछले माह राव इंद्रजीत विरोधी नेताओं को पूर्व मंत्री राव नरबीर सिंह ने भोज दिया था। इस बार बारी संतोष की थी। पहली बार 7 नेता एकत्रित हुए थे। इस बार यह संख्या बढ़कर 9 हो गई। मतलब दो नए एंटी राव चेहरों की एंट्री हुई, जिससे राव विरोधी मंच पहले से मजबूत हुआ। हालांकि सूत्रों की खबर यह है कि अभी इन नेताओं के बीच मैतक्य नहीं बन पाया है। राव विरोधी इस मुहिम को मजबूती से आगे बढ़ा रहे गुरुग्राम के एक नेता का इरादा 9 की संख्या को 20 तक पहुंचाना है।
इस बार भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुधा यादव का जुडऩा खास रहा। अन्य नेताओं में पूर्व मंत्री नरबीर सिंह, जगदीश यादव और बिक्रम ठेकेदार, विधायक सत्यप्रकाश जरावता, विस की पूर्व उपाध्यक्ष संतोष यादव, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद यादव, डेयरी प्रसंघ के चेयरमैन जीएल शर्मा व पूर्व विधायक तेजपाल तंवर शामिल थे।
पार्टी विरोधी भूमिका में नहीं
सभी नेताओं ने कई अहम विंदुओं पर चर्चा की। विशेष बात यह थी कि एंटी राव खेमा किसी भी सूरत में पार्टी विरोधी की भूमिका में नजर नहीं आना चाहता। सूत्रों के अनुसार राव का विरोध करने की बजाय सकारात्मक कार्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
एंटी राव गुट के नेताओं के बीच भी एकता नहीं
एंटी राव गुट के नेताओं के बीच भी एकता नहीं है। सूत्रों के अनुसार बैठक में कुछ नेताओं ने एक-दूसरे को आइना दिखाने का भी प्रयास किया। यह भी तय हुआ कि पहले खुद की मत भिन्नता दूर की जाए और एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय किया जाए। उदाहरण के लिए जब बात जिला प्रधान की नियुक्ति की आएगी तो एंटी राव खेमे के नेता अलग-अलग नाम की पैरवी करने की बजाय सिर्फ इस बात की पैरवी करेंगे कि पार्टी के किसी भी पुराने व वफादार कार्यकर्ता को बागडोर सौंप दी जाए। ऐसे में अगर केंद्रीय मंत्री भी उसका ही समर्थन करते हैं तो किसी तरह की दबाव की राजनीति नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार बैठक में राव विरोधी नेताओं के बीच समझ कायम करने के ठोस प्रयास हुए हैं।
देसी खाणे की खूब है चर्चा
राव विरोधी नेताओं ने बेशक अपने इस लंच को गोपनीय रखा, परंतु अब कुछ भी छुपा नहीं है। अब तो खास लोगों के बीच कढ़ी-चावल, सरसों का साग, खाटे का साग, बाजरा, मक्का व मेथी की रोटी की खूब चर्चा है। बहन जी की खीर, गुलाब जामुन और रसगुल्ला की बातें भी छनकर बाहर आ चुकी है। बहरहाल इस बिना खिचड़ी के लंच में अहीरवाल के नेताओं ने खूब राजनीतिक खिचड़ी पकाई, परंतु आन द रिकार्ड बात करें तो जवाब एक ही है-यह नव वर्ष का लंच था।

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