चुनाव

दिल्ली में नहीं चला अमित शाह का जादू , आठ सीटों में ही सिमटी भाजपा

आम आदमी पार्टी अपने नेता अरविंद केजरीवाल की फेस वैल्यू और सरकार के पांच साल के काम के बदौलत करीब-करीब पुराना रिकार्ड दोहराने में सफल रही। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का 2015 के विधानसभा चुनाव की तरह 63 जनसभा संबोधित करने, चुनाव को हिन्दुत्व के बलबूते लड़ने, गलियों में पर्चे बांटने, 240 सांसदों को चुनाव में उतरने का निर्देश देने, वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों को प्रचार में उतारने, पांच हजार जनसभा करने, हाईटेक प्रचार को अपनाने के बाद भी जादू नहीं चल पाया। इससे इतर कांग्रेस पार्टी रही। इस चुनाव में भी खाता

भाजपा के उपाध्यक्ष, दिल्ली के पूर्वप्रभारी श्याम जाजू हालांकि चुनाव परिणाम को बहुत नकारात्मक नहीं मानते। उनका कहना है कि पिछली बार भाजपा की तीन सीटें आई थीं। इस बार वोट भी बढ़े हैं और सीटें भी। जाजू का कहना है कि चुनाव के बाद पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी और दिल्ली में भाजपा को मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र नागर का कहना है कि जहां हिन्दुओं की आबादी की तुलना में मुसलमानों की अच्छी तादाद है, वहां वोटों का ध्रुवीकरण हुआ।

भाजपा ने वहां शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन जहां हिन्दुओं की अच्छी आबादी है, वहां ऐसा नहीं हो पाया। दिल्ली की जनता फिर केजरीवाल के साथ चली गई। शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के बाबत नागर का कहना है कि इसका असर हुआ है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अश्विनी कुमार के अनुसार दिल्ली का चुनाव परिणाम बहुत अच्छा आया है। सूत्र बताते हैं कि चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को फोन पर बधाई दे दी है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के खेमे में मध्यान्ह तीन बजे सन्नाटा पसरना आरंभ हो गया था। सूत्र बताते हैं कि अमित शाह को पहले से ही इस तरह का चुनाव परिणाम आने की आशंका थी। दोपहर बाद राज्यसभा और लोकसभा में भी सदस्यों की मौजूदगी बेहद कम थी।

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