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Ahmedabad Mumbai Bullet Train: बुलेट ट्रेन परियोजना पर कांग्रेस गरम, रोका गया तो लग सकता है बड़ा झटका

मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। Ahmedabad Mumbai Bullet Train आशंका व्यक्त की जा रही है कि महाराष्ट्र की नई शिवसेनानीत सरकार अहमदाबाद-मुंबई के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना (Bullet Train Project) में अड़ंगा लगा सकती है। इस परियोजना पर इन दिनों सरकार में शिवसेना (Shiv sena) की सबसे कनिष्ठ सहयोगी कांग्रेस सबसे ज्यादा गरम नजर आ रही है। लेकिन माना जा रहा है कि यदि इस परियोजना को रोका गया तो यह न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि समूचे पश्चिम भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका साबित होगा।
मोदी सरकार की प्राथमिकता
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने आज कहा कि बुलेट ट्रेन मोदी सरकार की प्राथमिकता हो सकती है। यह देश की प्राथमिकता कतई नहीं है। क्योंकि इस देश में हवाई मार्ग अब काफी प्रचलित हो चुके हैं, और मुंबई से अहमदाबाद के बीच हवाई टिकट ढ़ाई हजार से तीन हजार रुपयों के बीच आसानी से उपलब्ध होते हैं। जबकि बुलेट ट्रेन का किराया करीब 10,000 रुपए होने की बात कही जा रही है। सावंत सवाल उठाते हैं कि इतना किराया कौन देगा ? शायद इन बातों पर देश के प्रधानमंत्री ने विचार नहीं किया है।


बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र के लिए फायदेमंद नहीं

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार बुलेट ट्रेन का रूट मुंबई से अहमदाबाद बनाने के पीछे सिर्फ एक कारण नजर आता है कि मुंबई में आनेवाला उद्योग गुजरात की ओर आकर्षित किया जाए। इसलिए बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र के लिए कतई फायदेमंद नहीं है। यहां तक कि देश के लिए भी यह फायदेमंद नहीं है। अमरीका सरीखे उन्नत देश में जब बुलेट ट्रेन नहीं है, तो हमें इसकी क्या जरूरत है, इस पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है।
आर्थिक समृद्धि का रास्ता
दूसरी ओर बुलेट ट्रेन के पक्षधर आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बुलेट ट्रेन परियोजना पूरे पश्चिम भारत की आर्थिक समृद्धि का रास्ता खोल सकती है। गुजरात और महाराष्ट्र आज भले ही दो अलग राज्य हों, लेकिन दिसंबर 2023 में अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन की शुरूआत हो जाने के बाद ये दोनों राज्य एक बार फिर आजादी के पहले की बॉम्बे प्रेसीडेंसी जैसी स्थिति में आ सकते हैं, जब गुजरात और महाराष्ट्र एक ही राज्य का हिस्सा हुआ करते थे। ऐसा व्यावसायिक कारणों से होगा। क्योंकि गुजरात के तीन बड़े व्यावसायिक शहर अहमदाबाद, सूरत और बड़ोदरा की दूरी आर्थिक राजधानी मुंबई से सिर्फ दो से तीन घंटे की हो जाएगी। यही नहीं, बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशनों के आसपास बहुत बड़े पैमाने पर उद्योग-व्यवसाय लगने के कारण यह पूरा क्षेत्र देश की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन जाएगा, और पूरे पश्चिम भारत में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
फरों की संख्या
बुलेट ट्रेन परियोजना को पूर्ण करने के लिए बनाए गए नेशनल हाई-स्पीड रेल कार्पोरेशन लि. (एनएचएसआरसीएल) के सूत्रों के अनुसार शुरुआती दिनों में बुलेट ट्रेन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन से मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन के बीच प्रतिदिन 70 फेरे लगाएगी। यानी 35 फेरे साबरमती से मुंबई की ओर, और 35 फेरे मुंबई से साबरमती की ओर। लेकिन धीरे-धीरे इन फेरों की संख्या बढ़ती जाएगी। अब तक की योजना के अनुसार 2053 तक फेरों की कुल संख्या 70 से बढ़कर 105 तक हो जाएगी। यानी अभी सुबह-शाम कार्यालयीन अवधि में प्रत्येक 20 मिनट पर दोनों ओर से बुलेट ट्रेन छूटेगी, तो दिन की बाकी अवधि में हर आधे घंटे पर। लेकिन भविष्य में दो फेरों के बीच की अवधि और कम होती जाएगी। शुरुआत में बुलेट ट्रेन 10 डिब्बों की होगी, जबकि 2053 तक यह 16 डिब्बों की हो चुकी होगी। ये बुलेट ट्रेनें दो तरह की होंगी। एक रैपिड, दूसरी रेगुलर। रैपिड यानी अति तीव्र गति वाली।
जापानी तकनीक से तैयार की गयी है ट्रेन
ये ट्रेनें अहमदाबाद से मुंबई पहुंचने में सिर्फ 2.07 घंटे का समय लेंगी, और अपने मार्ग में सिर्फ बड़ोदरा और सूरत में रुकेंगी। जबकि सामान्य बुलेट ट्रेन यही दूरी 2.58 मिनट में तय करेगी, और साबरमती एवं बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के बीच अन्य सभी 10 स्टेशनों पर भी रुकेगी। बुलेट ट्रेन की गति 220 किमी. प्रति घंटे से 320 किमी. प्रति घंटे के बीच होगी। हालांकि पटरियां 350 किमी. प्रति घंटे की क्षमतावाली बनाई जा रही हैं। पूरी तरह जापानी तकनीक से बनी ये ट्रेनें एक तरफ के अपने अंतिम स्टेशन पर पहुंचने के बाद वहां से रवाना होने के लिए सिर्फ सात मिनट में तैयार हो जाएंगी। इसी इतनी देर में ट्रेन की सीटों का मुंह यात्रा की दिशा की ओर करके उनकी सफाई भी हो चुकी होगी। मुंबई से ठाणे के बीच 21 किमी. के भूमिगत एवं समुद्री खाड़ी के नीचे से निकलने वाले सुरंग मार्ग को छोड़ दिया जाए तो 487 किमी. की दूरी यह खंभों पर बने रेलवे ट्रैक (एलीवेटेड) पर पूरी करेगी।

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