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भाजपा से नाराज कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे- मोदी तुझसे बैर नहीं, मनोज तिवारी की खैर नहीं

दिल्ली के पूर्वांचली वोटरों को साधने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश की कमान पूर्वांचल के एक लोकप्रिय गायक चेहरे मनोज तिवारी के हाथ में दे दिया था। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के ही लोग मनोज तिवारी के विरोध में उतर आए हैं। रविवार को पंत मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय पर भाजपा के पूर्वांचल से जुड़े कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई और मनोज तिवारी के विरोध में नारेबाजी करने लगी। भीड़ ने ‘मोदी तुझसे बैर नहीं, मनोज तिवारी की खैर नहीं’ के नारे लगाए।

बीजेपी के इन कार्यकर्ताओं का आरोप था कि मनोज तिवारी के अध्यक्ष पद पर रहने के कारण ही उनके लोगों की उपेक्षा हुई है। कार्यकर्ताओं की यह भीड़ तब तक डटी रही जब तक कि प्रदेश कार्यालय ने पार्टी के पूर्वांचल मोर्चे के पूर्व अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह को बुलाकर इन्हें शांत नहीं कराया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि लक्ष्मीनगर सीट से इस बार भी अभय वर्मा को टिकट दिया गया है जबकि 2013 की लड़ाई में वे तीसरे स्थान पर रहे थे। जबकि इस सीट से बीजेपी के कई दमदार कार्यकर्ता वर्षों से पार्टी का झोला उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका ईनाम नहीं मिला।  

‘मोदी तुझसे बैर नहीं’ की तर्ज पर नारे सबसे पहले राजस्थान में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के खिलाफ लगे थे। इस चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

दरअसल, भाजपा ने इस चुनाव में भी पूर्वांचल के उन्हीं प्रत्याशियों पर दांव लगाया है जो 2013 या 2015 के चुनाव में बुरी तरह परास्त हो चुके हैं। कार्यकर्ताओं की मांग है कि इन जगहों पर नए ऊर्जावान चेहरों को मौका देना चाहिए। इसकी सबसे बड़ी मिसाल संजय सिंह को विकासपुरी सीट से टिकट मिलना बताया जा रहा है। वर्ष 2015 के चुनाव में संजय सिंह को केवल 54,772 वोट मिले थे जबकि उनके सामने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार महिंदर यादव को 1,32,437 वोट मिले थे। इस प्रकार भाजपा ने 67,665 वोटों से आप के हाथों हार गई थी। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस सीट पर किसी नए उम्मीदवार को मौका दिया जाना चाहिए था। बताया जाता है कि संजय सिंह को यह टिकट भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के दबाव के कारण मिला है, जबकि यह इलाका पूर्वांचल बहुल आबादी का है।

किरारी विधानसभा सीट से अनिल झा की उम्मीदवारी को ठीक माना जा रहा है क्योंकि 2008 और 2013 में उन्होंने वहां से जीत दर्ज की थी। हालांकि 2015 में वे आप के उम्मीदवार रितुराज गोविंद के हाथों चुनाव हार गए थे। लेकिन पूर्वांचल बहुल सीट बुराड़ी पर गोपाल झा को इस बार भी गलत उम्मीदवार बताया जा रहा है। 2015 में भी गोपाल झा आम आदमी पार्टी के संजीव झा के हाथों लगभग 68 हजार वोटों से हार चुके हैं।

रविवार को ही मंगोलपुरी सीट से टिकट पाए करमसिंह कर्मा की उम्मीदवारी का भी खूब विरोध हुआ। मंगोलपुरी से पार्टी दफ्तर पहुंचे कार्यकर्ताओं की मांग है कि करमसिंह कर्मा का टिकट काटकर किसी भी कार्यकर्ता को दिया जाए, लेकिन करमसिंह कर्मा को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि वे लगातार पार्टियां बदलते रहे हैं। वे इसके पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में भी रह चुके हैं। मंगोलपुरी सीट से आम आदमी पार्टी ने राखी बिड़लान को दुबारा मौका दिया है तो कांग्रेस ने अपने मजबूत उम्मीदवार राजेश लिलोठिया को मैदान में उतारा है। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है लगातार दल बदलने के कारण कर्मा की छवि ठीक नहीं है जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

गलत टिकट वितरण के आरोप में भाजपा को मॉडल टाउन, करावल नगर, पटपड़गंज, गांधीनगर और अन्य जगहों पर भी विरोध झेलना पड़ रहा है। भाजपा के दिग्गज नेता रहे करण सिंह तंवर के समर्थकों ने भी लागातार पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इस बीच सोमवार 20 जनवरी को भाजपा के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर तैयारियां हो रही हैं। ऐसे माहौल में शीर्ष नेताओं की व्यस्तता के कारण टिकटों में बदलाव की किसी संभावना नहीं बताई जा रही है। 

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