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साइरस मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के फ़ैसले पर रोक लगाई

: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपेलैट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की ओर से दिए गए साइरस मिस्त्री को टाटा समूह का एग्ज़िक्यूटिव चेयरमैन बहाल किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है.

18 दिसंबर को NCLAT ने एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध बताते हुए साइरस मिस्त्री को फिर से टाटा समूह के एग्ज़िक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर बहाल करने का आदेश दिया था.
हालांकि, अपेलैट ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया था कि मिस्त्री की बहाली चार हफ़्तों के बाद ही हो पाएगी और तब तक टाटा समूह को अपील दायर करने का अवसर दिया गया था.
इसके बाद टाटा सन्स ने सुप्रीम कोर्ट से एनसीएलएटी के इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील की थी. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर रोक लगाते हुए मिस्त्री को नोटिस जारी किया है.
मिस्त्री टाटा सन्स के छठे चेयरमैन थे मगर अक्तूबर 2016 में उन्हें हटा दिया गया था. वह रतन टाटा की ओर से रिटायरमेंट के ऐलान के बाद दिसंबर 2012 में कंपनी के चेयरमैन बने थे.
मिस्त्री को हटाए जाने के ख़िलाफ़ दो इन्वेस्टमेंट कंपनियों, साइरस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लमिटेड और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉर्पोरेशन ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच में अपील की थी मगर उनकी याचिकाएं ख़ारिज हो गई थीं.
बाद में NCLT के आदेश को चुनौती देने के लिए साइरस मिस्त्री ने अपनी ओर से भी NCLAT में अपील दायर की थी. मिस्त्री का कहना था कि उन्हें कंपनीज़ एक्ट के नियमों के अनुसार नहीं हटाया गया. उन्होंने टाटा सन्स पर कामकाज का सही से प्रबंधन न करने की बात भी कही थी.

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