latest

सबका विश्वास योजना: कर विवादों के निपटारे से सरकार को मिले 14.8 हजार करोड़

: सार

1,89,229 घोषणाएं की गईं करदाताओं की ओर से योजना के तहत

70 फीसदी तक की छूट मिली करदाताओं को विवादों का निपटारा करने में

विस्तार

कर विवादों के निपटारे के लिए शुरू की गई सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना बेहद सफल रही है। 15 जनवरी, 2020 को समाप्त हुई योजना की अवधि तक सरकार को कुल 14,821 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई है। योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान कुल 1,89,229 घोषणा-पत्र दाखिल किए गए। 
हालांकि, इस योजना की सफलता को अगर सिर्फ आंकड़ों की बानगी से देखेंगे तो यह अन्याय होगा। 1 सितंबर, 2019 को योजना की शुरुआत करते समय जो अपेक्षा की गई थीं, उसके मुकाबले सफलता कहीं ज्यादा बड़ी है। रिकॉर्ड को देखा जाए तो सरकार को लगभग 1.82 लाख घोषणाएं मिलने का अनुमान था, जबकि अंतिम परिणाम आने पर यह आंकड़ा काफी पीछे छूट गया।

इसी तरह, राजस्व के लिहाज से देखें तो 14,821 करोड़ रुपये का आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं लगता लेकिन योजना के तहत दी गई 70 फीसदी तक की विशाल छूट इन आंकड़ों को बड़ा बना देती है। योजना की वास्तविक सफलता आम करदाताओं को मिलने वाली राहत में समाहित है।

दरअसल, योजना के तहत आईं 1,89,229 घोषणाओं में से 69,712 मामले मुकदमेबाजी में फंसे थे। देखा जाए तो एक झटके में करीब 70 हजार करदाताओं को वर्षों से चली आ रही मुकदमेबाजी से छुटकारा मिलना कितनी बड़ी राहत की बात होगी। आमजन के साथ विभाग के लिए भी यह परिणाम किसी उपहार से कम नहीं है, क्योंकि मुकदमों में भारी कमी के बाद जीएसटी प्रशासन में अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। 

योजना की सफलता से मिली सीख

सबका विश्वास योजना-2019 की भारी सफलता के विश्लेषणों से कई सबक और सीख भी मिलती हैं, जिसका उपयोग भावी योजना में किया जा सकेगा। इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय करदाताओं को दी गई 70 फीसदी तक की भारी छूट को जाता है।

यह इस सिद्धांत को भी मजबूती प्रदान करता है कि भारत जैसे विकासशील देश में अगर कर की दरें कम होंगी तो उसका अनुपालन बेहतर होगा। दूसरी बड़ी सीख योजना के तहत 27 हजार से अधिक घोषणा पत्रों का स्वैच्छिक प्रकटीकरण है। यानी सात में से एक घोषणा स्वैच्छिक रही है।

वैसे तो स्वैच्छिक प्रकटीकरण को कर रियायत नहीं मिलती है, लेकिन दंड, ब्याज और अभियोजन से पूरी तरह छूट दी गई। योजना में यह प्रावधान किया गया कि प्रकटीकरण को बिना किसी सवाल के स्वीकार किया जाएगा। करदाताओं में स्वैच्छिक प्रकटीकरण को लेकर भरोसा सरकार के भयमुक्त और विश्वसनीय वादे के बाद ही जगा है।

सीबीआईसी की अहम भूमिका 

योजना की सफलता के पीछे इसकी व्यावहारिक रूपरेखा के अलावा केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की भी अहम भूमिका रही। बोर्ड ने सिर्फ निपुणतापूर्वक योजना का संचालन किया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों में समर्पण की भावना को भी जगाए रखा।

अधिकारियों-कर्मचारियों की दिनरात की गई मेहनत का नतीजा ही योजना की सफलता को दर्शाता है। यहां व्यापार एवं उद्योग जगत की भूमिका को भी कमतर नहीं आंका जा सकता, जिसने योजना का उचित अभिमूल्यन किया और लाभ लेकर परिपक्वता एवं विवेक का परिचय दिया। भारतीय व्यवसाय, व्यापार और उद्योग जगत अपनी भूमिकाओं के लिए प्रशंसा के पात्र हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button