latest

सदफ़ जफ़र की आपबीती: पुलिसवालों ने गंदी गालियां दीं, बाल पकड़कर थप्पड़ मारे

लखनऊ में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान जेल भेजी गईं कांग्रेस नेता और अभिनेत्री सदफ़ जफ़र ने गिरफ़्तारी से पहले हिरासत के दौरान पुलिस पर उनके शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है.
सदफ़ जफ़र को 19 दिसंबर को लखनऊ में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद गिरफ़्तार किया गया था.
बीबीसी से बातचीत में सदफ़ जफ़र ने बताया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उन्हें न सिर्फ़ अश्लील गालियां दीं बल्कि बुरी तरह से मारा-पीटा भी.
वो बताती हैं, “हजरतगंज के महिला थाने में मुझे एक पुलिस अधिकारी के कमरे में ले जाया गया. अधिकारी ने देखते ही गालियां देनी शुरू कर दीं और कहा कि तुम लोगों को क्या कमी है जो इतना बवाल काट रहे हो? तुम लोग खाते यहां को हो और गाते वहां की हो. फिर उसने मेरे बाल पकड़ कर सिर नीचे झुका दिया और थप्पड़ भी मारा.”
19 दिसंबर को शाम साढ़े चार बजे सदफ़ जफ़र अपने कुछ अन्य साथियों के साथ परिवर्तन चौक से वापस उस वक़्त घर जा रही थीं जब विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाज़ी और आगज़नी शुरू हो गई. उन लोगों को रास्ते में पकड़ लिया गया.
सदफ़ बताती हैं, “हम लोगों को पुलिस वाले मारते हुए काफ़ी दूर तक ले आए. मेरे घुटनों पर प्लास्टिक के डंडों से बुरी तरह मारा गया. मेरे साथ महिला पुलिसकर्मी थीं जो पुरुषों को भी मार रही थीं. फिर मुझे गाड़ी में बैठाकर थाने लाया गया. इस दौरान मेरे साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी. रात भर मैं रिक्वेस्ट करती रही कि घर में बच्चों को फ़ोन करके बता दूं कि मैं कहां हूं लेकिन इसकी इजाज़त नहीं दी गई. मेरा फ़ोन पहले ही छीन लिया गया था.”
सदफ़ बताती हैं कि किसी भी पुलिस वाले ने अपना बैज नहीं लगा रखा था ताकि उन्हें उनके नाम से कोई पहचान न पाए.
वो कहती हैं कि ऐसा न सिर्फ़ उनके साथ बल्कि दूसरे लोगों के साथ भी हुआ. उनके मुताबिक़, उनके पुरुष साथियों को भी बहुत मारा पीटा गया और बगल के कमरे से उनके चीखने की आवाज़ें भी सुनाई पड़ रही थीं लेकिन लखनऊ में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सदफ़ के दावे में कोई सच्चाई नहीं है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया, “ये आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं. जेल भेजने से पहले किसी का भी मेडिकल परीक्षण कराया जाता है. इन लोगों का भी कराया गया. यदि उनके साथ मारपीट हुई होती तो चोट लगती, घाव होते, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था. यहां तक कि रात में उन्होंने बीमार होने की बात कही तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया और दवा दिलाई गई.”
दवा दिलाने की बात सदफ़ भी स्वीकार करती हैं.
उनका कहना है, “रात क़रीब दो बजे, जब मैंने अपना ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायत की तो मुझे हॉस्पिटल ले जाया गया और एक इंजेक्शन लगवाया गया. वहां से वापस थाने ले आया गया. डॉक्टरों को साफ़ तौर पर निर्देश दिए गए थे कि वो मेरे शरीर पर आई दूसरी चोटों के लिए कोई दवा न दें.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button