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मनी लॉन्ड्रिंग मामला: DHFL के मालिक कपिल वधावन को ईडी ने किया गिरफ्तार

[ दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के सीएमडी कपिल वधावन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले ईडी ने पिछले साल अक्तूबर में डीएचएफएल और अन्य संबंधित कंपनियों के लगभग एक दर्जन परिसरों पर छापेमारी की थी। प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में छापे मारे गए थे। कपिल वधावन को दो दिन की हिरासत में भेजा गया है। 
यह है मामला

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) का सबलिंक रियल एस्टेट से कथित तौर पर कारोबारी संबंध है। सबलिंक रियल एस्टेट वित्तीय लेन-देन को लेकर की जा रही जांच के केंद्र में है। डीएचएफएल ने रियल एस्टेट कंपनी को 2,186 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी इस नए अभियान के तहत दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों के रूप में साक्ष्य तलाश रही है। डीएचएफएल ने इससे पहले कहा था कि कथित संदिग्ध लेन-देन से उसका कोई संबंध नहीं है।

प्रफुल्ल पटेल से भी की थी पूछताछ

एजेंसी ने इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल से भी पूछताछ की थी। पटेल पर मिर्ची के परिवार के साथ कथित तौर पर संपत्ति संबंधी सौदा करने का आरोप है। पटेल ने कुछ भी गलत किए जाने से इनकार किया था।

UPPCL घोटाले में भी कंपनी का नाम

साल 2017 से अब तक यूपीपीसीएल ने 4,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिटायरमेंट फंड हाउसिंग फाइनेंस कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में निवेश किया है। इसमें से यूपीपीसीएल को केवल 1,855 करोड़ रुपये ही मिले हैं।

दोनों अफसरों ने मिलकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कर्मचारियों के भविष्य निधि के चार हजार करोड़ रुपये दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफसीएल) में निवेश कर दिए थे। अब भी इस कंपनी में कर्मचारियों के 2268 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। हालांकि राज्य सरकार ने कहा है कि अगर रकम वापस नहीं मिलती है तो वो अपनी तरफ से भुगतान करेगी। यूपीपीसीएल को अब तक डीएचएफएल से केवल 1,855 करोड़ रुपये ही मिले हैं।

क्या है यूपीपीसीएल घोटाला?

सुधांशु द्विवेदी और प्रवीण गुप्ता ने उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन अंशदायी भविष्य निधि ट्रस्ट में जमा  जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि को डीएचएफएल में लगा दिया गया था। उस समय प्रवीण सीपीएफ और जीपीएफ ट्रस्ट का कार्यभार संभाल रहे थे।

उन्होंने तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी से अनुमोदन प्राप्त कर वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के 2015 के आदेश को दरकिनार करते हुए फंड की 50 प्रतिशत से अधिक राशि को डीएचएफसीएल में निवेश किया। गौरतलब है कि डीएचएफएल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में शामिल नहीं है।

ऐसे हुआ था यूपीपीसीएल में घोटाला

इस घोटाले को संदिग्ध शेल कंपनियों/पास-थ्रू कंपनियों को बहुत बड़ी रकम का जमानती और गैर जमानती कर्ज देकर अंजाम दिया गया। ये सभी शैल कंपनियां डीएचएफएल के मालिकों कपिल वधावन, अरुणा वधावन और धीरज वधावन से संबंधित हैं। इन लोगों ने कंपनी की वित्त समिति में अपनी सदसयता होने से मिली शक्तियों का फायदा उठाया।

इस कंपनी के वित्त समिति के सदस्यों को यह हक मिलता है कि वह 200 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज की मंजूरी दे सकें। इसका इस्तेमाल करते हुए इन लोगों ने अपने द्वारा बनाई गयी फर्जी कंपनियों को लोन दिया और उसका इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए किया। इन लोगों ने एक लाख के मामूली पूंजी से दर्जनों फर्जी कंपनियां बनाईं। इन सारी कंपनियों के पते एक हैं और इनके डायरेक्टर भी एक हैं। यहां तक कि इन कंपनियों के खातों की जांच करने वाले ऑडिटरों भी एक ही समूह से जुड़े हैं। 

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