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बैंकों में धोखाधड़ी होने पर एमडी-सीईओ नहीं होंगे जिम्मेदार, वित्त मंत्रालय ने लिया फैसला

[ सार
बैंकर्स के उचित व्यावसायिक फैसलों के बचाव के लिए उठाए ऐसे कई कदम
50 करोड़ से ज्यादा के मामले शुरुआती जांच के लिए जाएंगे वित्तीय धोखाधड़ी परामर्श बोर्ड के पास
विस्तार
अब सरकारी बैंकों (पीएसबी) में होने वाली धोखाधड़ी के लिए उनके एमडी और सीईओ व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं होंगे। सरकार ने बैंकर्स के उचित व्यावसायिक फैसलों को सुरक्षा देने के मद्देनजर यह फैसला लिया है। इससे बैंक अधिकारियों द्वारा की गईं बड़ी धोखाधड़ी से जुड़े मामलों से निपटना आसान हो जाएगा।वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इस क्रम में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने सरकारी ऋणदाताओं के बोर्ड को आरबीआई और सीवीसी के सर्कुलर के माध्यम से दी गईं विभिन्न समयसीमाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के वास्ते एक उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने का अधिकार सौंप दिया गया है।

बयान के मुताबिक, ‘इसी प्रकार डीएफएस के 2015 में जारी 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के सभी एनपीए में धोखाधड़ी की अनिवार्य जांच से संबंधित आदेश को 15 जनवरी, 2020 के सीवीसी सर्कुलर के साथ श्रेणीबद्ध कर दिया गया है, जिसमें संदिग्ध धोखाधड़ी के ऐसे सभी मामलों को शुरुआती तौर पर पूर्व सतर्कता आयुक्त टीएम भसीन की अगुवाई वाले बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी परामर्श बोर्ड (एबीबीएफएफ) को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।’
वित्त मंत्री दिला चुकी हैं भरोसा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई मौकों पर बैंकर्स को भरोसा दिला चुकी हैं कि उनके द्वारा ईमानदारी से लिए गए व्यावसायिक फैसलों को सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उचित व्यावसायिक नाकामियों और अपराध के बीच अंतर किया जाएगा। व्यापक तौर पर ऐसी आशंकाएं हैं कि गलत साबित होने वाले सही व्यावसायिक फैसलों के लिए बैंकर्स को आरोपी बनाया जा सकता है। इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने पिछले महीने एक कार्यक्रम में बैंकर्स को भरोसा दिलाया था कि उचित व्यावसायिक नाकामियों और अपराधों के बीच अंतर किया जाएगा। इस कार्यक्रम में सीबीआई के निदेशक भी मौजूद रहे थे।
आशंकाएं दूर करेगी सीबीआई
उन्होंने बैंकर्स से यह भी कहा था कि सीबीआई उनकी आशंकाओं को दूर करने के लिए सतर्कता अधिकारियों, वरिष्ठ प्रबंधकों से लेकर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श और कार्यशालाओं का आयोजन करेगी। सरकारी कंपनियों में प्रबंधकों के व्यावसायिक फैसलों से जुड़ी जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग ने जीएम और इससे ऊपर की रैंक वाले सरकारी अधिकारियों से जुड़े 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध धोखाधड़ी के मामलों में जांच से पहले होने वाली अनिवार्य प्राथमिक स्तर की जांच के लिए एबीबीएफएफ का गठन किया है।
बैंक स्तर पर भी बनेगी समिति
सीतारमण ने कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाने और उत्पीड़न की संभावनाएं कम करने के लिए सरकारी बैंकों के प्रमुखों को अपने कर्मचारियों के खिलाफ चल रहे अनियमितताओं से संबंधित सतर्कता मामलों को निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए थे कि बैंकों को लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण के वास्ते समयसीमा या बंद करने के लिए महाप्रबंधक की अगुवाई में एक समिति का गठन करना चाहिए। बैठक में हुए फैसले के क्रम में वित्त मंत्रालय ने 27 जनवरी को बैंकों को प्रक्रियागत देरी के कारण लंबित अनुशासनात्मक और आंतरिक सतर्कता मामलों की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाने के निर्देश दिए।

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