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बारह हफ्ते में मिट्टी बनने वाला प्लास्टिक ईजाद, सीपैट ने भी दी मान्यता

o: पॉलीथिन की थैलियां अब पर्यावरण के लिए सिरदर्द नहीं होंगी। प्लास्टिक की ऐसी थैली तैयार कर ली गई है, जो कूड़े में फेंके जाने पर 12 सप्ताह के भीतर स्वत: ही मिट्टी बन जाएगी। इस थैली को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स टेक्नोलॉजी (सीपैट) ने भी मान्यता दे दी है। इसके बाद ऐसी थैलियों के उत्पादन व प्रयोग पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी मुहर लगा दी है।

तीन माह से भी कम अंतराल में स्वत: ही मिट्टी बनने (कंपोस्टेबल एंड बायोडिग्रेडेबल) वाली थैली को देहरादून की ही सिद्धी पैकेजिंग कंपनी ने ईजाद किया है। उत्पाद को तैयार करने के बाद उन्होंने इसे टेस्टिंग के लिए सीपैट (चेन्नई) को भेजा था। वहां आठ महीने तक थैली को विभिन्न परीक्षण से गुजारा गया। परीक्षण के दौरान जब ये थैलियां मिट्टी में तब्दील हो गईं तो इस मिट्टी पर टमाटर व धान उगाए गए। इस मिट्टी में उत्पादन की स्थिति 91 से 92 फीसद रही। जब सीपैट की रिपोर्ट को सीपीसीबी में जमा कराया गया तो यहां से भी उत्पाद को आसानी से हरी झंडी दे दी गई। हालांकि, केंद्रीय बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि इस तरह की थैलियों के उत्पादन में हर थैली पर सीपैट की रिपोर्ट का नंबर, कंपनी का लाइसेंस नंबर व 100 फीसद कंपोस्टेबल/बायोडिग्रेडेबल लिखना जरूरी होगा। ताकि किसी भी तरह की जांच के समय डुप्लीकेसी को पकड़ा जा सके।

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