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बजट 2020: सात फीसदी वेतनभोगी देते हैं सर्वाधिक टैक्स, फिर भी नहीं मिलती है कोई सुविधा

देश भर में वेतनभोगी करदाता जितना टैक्स चुकाते हैं, उसके मुकाबले गैर-वेतनभोगी पर आयकर देय नहीं होता है। देश भर में आलम यह है कि दिल्ली-मुंबई में रहने वाला क्लर्क जिसकी मासिक आमदनी 10 हजार रुपये है, वो भी टैक्स भरता है। हालांकि यूपी या फिर पंजाब का बड़ा किसान जो साल भर में पांच लाख रुपये से अधिक कमाता है, उसकी आमदनी पर किसी तरह का कोई टैक्स देय नहीं होता है। अभी आयकर की हालत ये है कि 15 लाख की गाड़ी खरीदने वाला व्यक्ति केवल 18.78 लाख रुपये अतिरिक्त पैसा टैक्स पर सरकार को दे देता है। इसमें पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स के अलावा टोल प्लाजा पर लगने वाला शुल्क भी शुमार है।
43 फीसदी चुकाते हैं आयकर
30 लाख की सालाना कमाई वाला व्यक्ति आयकर के तौर पर अपनी आय का 43 फीसदी वेतन दे देता है। फिलहाल अभी आयकर की दर 30 फीसदी है, लेकिन इस पर 13 फीसदी सेस और सरचार्ज के तौर पर अतिरिक्त लिए जाते हैं। अभी भी देश में निजी या फिर सरकारी नौकरी में लगे लोगों से आयकर वसूला जाता है, जो केवल सात फीसदी है।
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नौकरी पेशा व्यक्ति एक साल में कुल 76306 रुपये टैक्स के तौर पर देता है। वहीं गैर-नौकरीपेशा व्यक्ति केवल 25753 रुपये टैक्स के तौर पर देता है। इस हिसाब से इसमें तीन गुणा का अंतर देखने को मिलता है। अगर गैर नौकरी पेशा व्यक्ति भी टैक्स देने लगें तो सरकार को इससे 50 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होनी लगेगी। हालांकि अभी तक किसी भी वित्त मंत्री ने इसके बारे में किसी तरह का कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
15 लाख की गाड़ी खरीदने के लिए होना चाहिए 21 लाख की कमाई
अगर कोई व्यक्ति देश में 15 लाख रुपये की गाड़ी को खरीदना चाहता है, तो उसकी सालाना कमाई 21.42 लाख रुपये होनी चाहिए। 15 लाख की गाड़ी पर उस व्यक्ति को 6.42 लाख टैक्स के तौर पर देने होंगे। कार के कुल मूल्य में से कंपनी और डीलर को 9.80 लाख रुपये मिलते हैं, जिस पर टैक्स के तौर पर वो 5.20 लाख रुपये देते हैं।

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