आम मुद्दे

पुलिस अफसरों के परिवार वाले उठा रहे हैं सरकारी गाड़ी और ड्राइवर का लुत्फ, रिटायर्ड डीजी भी हैं शामिल

केंद्र सरकार आए दिन खर्च घटाने पर जोर देती है, तो वहीं अर्धसैनिक बलों में तैनात कई आईपीएस अफसरों की बीवियां सरकारी गाड़ी, ड्राइवर और कुक का लुत्फ उठा रही हैं। भले ही वे अफसर दिल्ली से बाहर तैनात हैं, लेकिन उन्होंने अपनी बीवियों के लिए बल मुख्यालय से कह कर गाड़ियों और ड्राइवर का इंतजाम कर रखा है।

सरकारी कुक भी अपनी सेवा देता है। ड्राइवर, कुक की सेलरी और पेट्रोल डीजल को मिलाकर वह खर्च एक लाख रुपये प्रतिमाह से ऊपर चला जाता है।
कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जो डीजी स्तर के पद से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरकारी वाहन उपलब्ध कराया गया है। सीआरपीएफ में एक आईपीएस, जो मणिपुर में आईजी के पद पर तैनात हैं, उन्होंने कथित तौर पर वहां से सड़क के जरिये दिल्ली में रह रही अपनी पत्नी के लिए इनोवा गाड़ी भेज दी है।
 सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में खासतौर पर, सीआरपीएफ मुख्यालय ने कुछ अधिकारियों की पत्नियों को वाहन उपलब्ध कराया है। इससे फोर्स का खर्च अनावश्यक तौर पर बढ़ रहा है। सीआरपीएफ से डीजी रैंक पर रिटायर हुए पूर्व आईपीएस को स्विफ्ट कार दी गई है। इस कार का नंबर ‘HR-70 2D 8510’ बताया गया है। यह गाड़ी लंबे समय से पूर्व आईपीएस इस्तेमाल कर रहे हैं।

दूसरी गाड़ी इनोवा ‘AS 01 AV 3786’ है। सूत्रों के अनुसार, यह गाड़ी सीआरपीएफ के दिल्ली स्थित मुख्यालय से जारी नहीं हुई है। इसे मणिपुर की 32 बटालियन से दिल्ली भेजा गया है। चूंकि वहां तैनात एक आईपीएस का परिवार दिल्ली में रहता है, इसलिए उनके लिए यह गाड़ी रोड के जरिये यहां लाई गई है।

इनके अलावा काले रंग की मारुति सियाज कार जिसका नंबर HR 36AA 0003 है। एडीजी रैंक से रिटायर हुए एक अधिकारी को अलॉट की गई है। बताया जाता है कि उस अधिकारी को कार के अलावा गनमैन भी दिया गया है।

इतना ही नहीं, कई दूसरे अफसर भी ऐसे हैं, जो दो-दो जगह पर फोर्स की सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीआरपीएफ में रहे एक अधिकारी जो कि अब एडीजी रैंक में हैं, वे 2012 के दौरान अपने मूल कॉडर में चले गए थे, लेकिन उनके पास अभी तक फोर्स का कुक लगा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि इस समय सीआरपीएफ में करीब छह हजार कुक भर्ती होने हैं।

कुक की कमी इसलिए महसूस हो रही है, क्योंकि एक अफसर ने दो-दो जगहों पर कुक रख रखे हैं। सेवा से रिटायर हो चुके लोगों ने भी सरकारी कुक ले रखे हैं।

इस मुद्दे पर सीआरपीएफ के आईजी एमएस भाटिया कहते हैं कि वाहन मुहैया कराने का कोई नियम तो नहीं है। कई बार अधिकारी के स्तर को देखते हुए कुछ सुविधाएं दे दी जाती हैं। हमारे क्षेत्राधिकार में हेडक्वार्टर से जुड़ी गाड़ियों का लेखा-जोखा रहता है। कई बार ऐसी सुविधाएं प्रोविजनिंग शाखा भी मुहैया कराती हैं।

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