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पाकिस्तान: मुशर्रफ़ पर फ़ैसले के बाद फौज और न्यायपालिका में टकराव?

पाकिस्तान के सेना प्रमुख और राष्ट्रपति रहे जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को देशद्रोह के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई.

साल 2007 में पाकिस्तान के संविधान को निलंबित कर देश में आपातकाल लागू करने के इलज़ाम में जनरल मुशर्रफ़ को कसूरवार ठहराया गया था.

इस्लामाबाद के स्पेशल कोर्ट ने पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत पूर्व सैनिक तानाशाह को मौत की सज़ा सुनाई.

इस प्रावधान के अनुसार जो कोई भी देश के संविधान को निष्प्रभावी करता है, या पलट देता है, या फिर निलंबित करता है या थोड़े समय के लिए ही सही इसे रोक देता है तो उसे देशद्रोह के लिए कसूरवार माना जाएगा और इसके लिए अपराधी को सज़ा-ए-मौत या उम्र क़ैद की सज़ा दी जाएगी.

इस सिलसिले में 17 दिसंबर को आए एक छोटे से आदेश ने उस पाकिस्तान में हंगामा ही बरपा दिया जहां ताक़तवर सैनिक प्रतिष्ठान पर पर्दे के पीछे से हुकूमत करने का इलज़ाम लगता रहा है.

पाकिस्तान के ज़्यादातर सेना प्रमुखों ने तख़्तापलट के बाद सीधे शासन किया या फिर चुनी हुई सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश की.

जनरल मुशर्रफ़ ने तो बग़ावत के बाद मुल्क की कमान ही अपने हाथ में ले ली थी.

हालांकि इस दफा ये पहली बार हुआ है कि किसी पूर्व सेना प्रमुख को गद्दारी के आरोप में दोषी पाया गया और इसके लिए उन्हें मृत्यु दंड की सज़ा दी गई.

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