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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ केरल सरकार ने दिया विज्ञापन, गवर्नर आरिफ खान ने जताई आपत्ति

नागरिकता संशोधन कानून का केरल सरकार शुरू से ही विरोध कर रही है। कुछ दिन पहले इसके विरोध में केरल विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित किया गया था। अब सरकार ने सरकारी पैसों से इसके खिलाफ राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन दिया है। इसे लेकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आपत्ति जताई है। विज्ञापन के विरोध में राज्यपाल खान खुलकर सामने आ गए हैं।

राज्यपाल खान ने कहा कि राजनीतिक प्रचार के लिए जनता के पैसे की बर्बादी करना पूरी तरह से गलत है। गौरतलब है कि राज्य प्रायोजित विज्ञापन शुक्रवार को प्रकाशित किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि राज्य संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की कोशिशों का नेतृत्व कर रहा है और केरल विधानसभा सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाली पहली विधानसभा है।

खान ने दिल्ली में टेलीविजन चैनलों से कहा कि सार्वजनिक धन का प्रयोग राजनीतिक अभियान पर खर्च करना पूरी तरह गैरजरूरी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल संसद की ओर से पारित कानून के खिलाफ किया गया। यह मेरे लिए थोड़ा अजीब है।

राज्यपाल ने कहा कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी इस तरह का विज्ञापन देती, तब यह तब समस्या नहीं होती। केरल सरकार ने तीन राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर कहा था कि राज्य ने लोगों की चिंताओं के मद्देनजर साहसिक कदम उठाए गए हैं और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के अभियान को रोक दिया है, जिससे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) बनेगा।

विज्ञापन में दावा किया गया कि राज्य मानव विकास सूचकांक में सबसे आगे है और गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य मानकों, शिक्षा, लैंगिक समानता और नवोन्मेषी विचारों के मामलों में अन्य राज्यों के मुकाबले शीर्ष रैंकिग पर है।

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