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देविंदर सिंह डीएसपी पद से सस्पेंड, बर्ख़ास्त करने की सिफ़ारिश

भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथियों की सहायता करने के आरोप में गिरफ़्तार पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. अब उनको बर्ख़ास्त करने की तैयारी चल रही है.
जम्मू कश्मीर के डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि पूछताछ में जो चीज़ें सामने आई हैं वो अभी सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं.
उन्होंने कहा, ”हमने उन्हें (डीएसपी देविंदर सिंह) सस्पेंड कर दिया है. हम सरकार को सिफ़ारिश भेज रहे हैं कि उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया जाए.”
इसके अलावा यह भी चर्चा है कि उन्हें दिया गया मेडल भी वापस ले लिया जाएगा.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डीएसपी देविंदर सिंह को बीते शुक्रवार दो चरमपंथियों के साथ श्रीनगर-जम्मू हाइवे पर गिरफ़्तार किया है. पुलिस के मुताबिक़ उन्हें सूचना मिली कि दोनों चरमपंथी शोपियां से भाग रहे हैं, जिसके बाद ऑपरेशन शुरू किया गया था.
जम्मू-कश्मीर के आईजी पुलिस विजय कुमार के मुताबिक़, ”शोपियां में एक ऑपरेशन के दौरान एक डीएसपी को हिज़बुल मुजाहिदीन के दो चरमपंथियों के साथ गिरफ़्तार किया गया. तीनों एक ही गाड़ी में थे. उनसे पूछताछ की जा रही है.”

कौन हैं देविंदर सिंह

57 साल के देविंदर सिंह 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ चलाए गए अभियान के दौरान प्रमुख पुलिसकर्मियों में रहे हैं.
देविंदर सिंह भारत प्रशासित कश्मीर के त्राल इलाक़े के रहने वाले हैं जिसे चरमपंथियों का गढ़ भी कहा जाता है. कश्मीर में मौजूदा चरमपंथ का चेहरा रहे शीर्ष चरमपंथी कमांडर बुरहान वानी का भी संबंध त्राल से था.
डीएसपी देविंदर सिंह के कई सहकर्मियों ने बीबीसी को बताया कि वो ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों (जैसे बेक़सूर लोगों को गिरफ्तार करना, उनसे मोटी रक़म लेकर रिहा करना) में शामिल रहे हैं लेकिन हर बार वो नाटकीय ढंग से इन सब आरोपों से बरी हो जाते थे.

कई तरह के आरोप

एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि देविंदर सिंह ने 1990 के दशक में एक शख़्स को भारी मात्रा में अफीम के साथ गिरफ़्तार किया था लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया और अफीम बेच दी. उस मामले में भी उनके ख़िलाफ़ जांच शुरू हुई लेकिन जल्द ही इसे बंद कर दिया गया.
देविंदर के माता-पिता और उनका 14 साल का बेटा दिल्ली में रहते हैं. उनकी दो बेटियां बांग्लादेश में रहकर मेडिकल साइंस की पढ़ाई कर रही हैं.
जम्मू, दिल्ली और कश्मीर में उनकी संपत्तियों की जाँच की जा रही है लेकिन उनके सहकर्मियों का कहना है कि चरमपंथियों की ओर से धमकियां मिलने के बाद वो पॉश कॉलोनी संत नगर से इंदिरा नगर शिफ्ट हो गए थे. पुलिस अधिकारी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि चरमपंथी अब फोर्स में घुसपैठ करने में कामयाब हो गए हैं.
देविंदर सिंह के साथ पकड़े गए दो चरमपंथियों में से एक नावीद, पूर्व पुलिसकर्मी हैं. नावीद साल 2012 में पुलिस में भर्ती हुए थे और साल 2017 में बड़गाम में एक पुलिस चौकी से पांच राइफल्स लेकर फरार हो गए थे.
तमाम सारे विवादों के बीच देविंदर सिंह का 30 साल का पुलिस करियर संसद पर हुए चरमपंथी हमले के आसपास घूम रहा है. हालांकि अफ़ज़ल गुरु को तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने के पांच दिन बाद सामने आए पत्र को लेकर किसी तरह की जांच नहीं की गई.
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