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थोड़ी कोशिश हुई तो रामनगरी में आएंगे हर वर्ग के पर्यटक, यहां हैं कई पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक इमारतें

[: रामनगरी में केवल मंदिर ही नहीं पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक इमारतेें भी हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं। इसमें मणिपर्वत, सुग्रीवकिला, जैनमंदिर, कनकभवन, हनुमानगढ़ी, राजप्रासाद राजसदन, भरतकुंड, दशरथसमाधि, श्रृंगी ऋषि आश्रम, कामाख्यादेवी मंदिर के अलावा बेगम मकबरा, गुलाबबाड़ी आदि ऐसे स्थल हैं, जो स्थापत्य कला के नमूने हैं। अगर इसे पर्यटन के नजरिए से सजाया जाए तो देशी-विदेशी सैलानियों की आमद बढ़ सकती है।

तीर्थनगरी के रूप में प्रतिष्ठित अयोध्या केवल रामजन्मभूमि होने के कारण ही नहीं चर्चित है, बल्कि पर्यटन की संभावना से भरी-पूरी है। चरम आस्था की प्रतीक पुण्य सलिला सरयू की सुरम्यता बरकरार है। महाभारत काल में रामनगरी वैभव धूमिल पड़ा तो भारतीय लोककथाओं के नायक महाराज विक्रमादित्य ने दो हजार वर्ष पूर्व रामनगरी का जीर्णोद्धार कराया। कनकभवन, हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ, छोटी देवकाली जैसे पौराणिकता के प्रतिनिधि मंदिर विक्रमादित्य के समय के माने जाते हैं, जो अपनी प्राचीनता के साथ स्थापत्य की दृष्टि से बेजोड़ हैं। रामनगरी के पांच दर्जन उपेक्षा के बावजूद गौरवमय अतीत के संवाहक और पर्यटन की संभावना से युक्त हैं।

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