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तेल के कारोबार और अपना वर्चस्‍व बढ़ाने के लिए US ने खतरे में डाला पूरा मिडिल ईस्‍ट

[ ईरानी कुद्स फोर्स के चीफ मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद मिडिल ईस्‍ट के सभी देश डर के साए में जी रहे हैं। इराक ने भी इस कासिम पर हुए हमले को कड़ाई से लिया है और इसको राजनीतिक हत्‍या करार दिया है। इतना ही नहीं इराक की पार्लियामेंट में पीएम ने देश में मौजूद विदेशी सेनाओं को वापस चले जाने की भी अपील की है। उनका कहना है कि देश और क्षेत्र की शांति के लिए यही सबसे बेहतर विकल्‍प है। कासिम की मौत के बाद विभिन्‍न अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए हैं।

क्‍या कहते हैं जानकार

मध्‍य पूर्व के लगातार खराब होते हालातों पर विदेश मामलों के जानकार कमर आगा ये तो मानते हैं कि हालात काफी हद तक खराब हो रहे हैं, लेकिन उनका ये भी कहना है कि खाड़ी युद्ध या वर्ल्‍ड वार के हालात नहीं बनने वाले हैं। उनका मानना है कि अमेरिका के पास ऐसा करने के लिए न तो उतना पैसा है और न ही इतना समय। इसके अलावा यदि अमेरिका ऐसा कदम उठाता भी है तो भी उससे अमेरिका का मकसद पूरा नहीं हो सकेगा। उनके मुताबिक यदि हम ईरानी सरकार सरकार को हटाकर दूसरी सरकार के बारे में सोच भी लें तब भी यह तय है कि वह अमेरिकी हितों की रक्षा करने वाली नहीं होगी।

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