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तनाव और बढ़ा तो प्रभावित होगी भारतीय अर्थव्यवस्था, जीडीपी पर बढ़ेगा 0.40 फीसदी तक का बोझ

अमेरिका के हवाई हमले में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत की खबर के चलते दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। इससे अपनी कुल तेल जरूरतों का 84 फीसदी कच्चा तेल विदेशी बाजारों से खरीदने वाले भारत की परेशानी बढ़ सकती है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल और व्यापार घाटा भी बढ़ेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और जीडीपी पर 0.40 फीसदी तक बोझ बढ़ जाएगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने सितंबर में बताया था कि कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर के इजाफे से भारत पर सालाना 10,700 करोड़ रुपये का असर पड़ता है। ऐसे में अगर मौजूदा बढ़ोतरी साल भर तक कायम रहती है तो बढ़े हुए तीन डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से खजाने पर तकरीबन 32,100 करोड़ सालाना का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। वैश्विक वित्तीय कंपनी नोमुरा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के राजकोषीय घाटे और चालू खाता भुगतान पर असर होता है। महंगे कच्चे तेल से जीडीपी पर 0.10 से 0.40 फीसदी तक का बोझ बढ़ जाता है।

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