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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से घटेगी ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची, यात्रियों को होगी सहूलियत

भारतीय रेलवे यात्रियों को सहूलियत देने के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर तेजी से कार्य कर रहा है। जिससे माल ढुलाई वाली ट्रेनें यात्री ट्रेनों से इतर अलग रास्ते पर चलेंगी। इससे यात्री ट्रेनों वाले मार्गों पर पड़ने वाला दवाब कम होगा। ऐसा होने पर यात्री ट्रेनों के मार्ग पर ज्यादा ट्रेनों को संचालित किया जाएगा। इससे वर्तमान में यात्रियों को मिलने वाली प्रतीक्षा सूची को घटाकर शून्य पर लाया जा सकेगा

प्रेस को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि रेलवे अगले 10 सालों में लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर तीन अतिरिक्त फ्रेट कॉरिडोर बनाने पर काम कर रहा है। जिसके बाद यात्री ट्रेनों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाएगा और ढुलाई की ट्रेनें अपने मार्गों पर चलेंगी। जिससे ज्यादा यात्री ट्रेनों को चलाया जाएगा और यात्रियों के लिए वेटिंगलिस्ट खत्म हो जाएगी।

यादव ने कहा, ‘यात्री दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा के दो सबसे व्यस्त मार्गों पर अगले पांच सालों के अंदर वेटिंगलिस्ट से मुक्त होने की उम्मीद कर सकते हैं। यहां डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के निर्माण का कार्य चल रहा है और इसके 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है।’

उन्होंने कहा कि रेलवे का दृष्टिकोण यह था कि जब डीएफसी पूरा हो जाए तो मौजूदा मार्ग पूरी तरह से माल ढुलाई से मुक्त हो जाएंगे, जिसके परिणामस्वरूप यात्री ट्रेनों को मांग के आधार पर चलाया जा सकेगा। उन्होंने कहा, ‘160 किमी प्रति घंटे (ट्रेन की गति) के मार्ग को अपग्रेड करने का काम पहले ही स्वीकृत हो चुका है और अगले चार सालों में इसे पूरा कर लिया जाएगा।’

यादव ने यह भी कहा कि रेलवे का जोर डीएफसी पर होगा। भडान-खुर्जा खंड (194 किमी) के पूर्वी डीएफसी को पूरा कर लिया गया है और 2019 से इसपर वाणिज्यिक परीक्षण शुरू हो गए हैं। वहीं रेवाड़ी-मदार खंड (305 किमी) के पश्चिमी डीएफसी को भी पूरा कर लिया गया है और इसपर वाणिज्यिक परीक्षण 27 दिसंबर, 2019 से शुरू हो गए हैं।

यादव ने यह भी कहा कि यात्री ट्रेनों की औसत गति 60 प्रतिशत बढ़ाने को मंजूरी दी गई है जिससे की राजधानी ट्रेन पूरी तरह से रात्रि यात्रा वाली हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि 2014-20 में 194 ट्रेनों को उत्कर्ष मानक में अपग्रेड किया गया है और अप्रैल-अक्टूबर 2019 के बीच 78 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की गई हैं।

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