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ट्राई बदलेगा लाइसेंस विलय के नियम, राजस्व और ग्राहक संख्या पर होगा कंपनी का आकलन

सार

दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने मुकदमेबाजी की वजह से हुई देरी पर कंपनियों को राहत दी है। अभी तक लाइसेंस विलय के लिए कंपनियों को अधिकतम एक साल का समय दिया जाता रहा है। 

विस्तार

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कंपनियों के लाइसेंस विलय प्रक्रिया के मानकों में बड़े बदलाव की सिफारिश की है। ट्राई ने शुक्रवार बताया कि अब मोबाइल और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की बाजार भागीदारी का निर्धारण करते समय ग्राहकों की संख्या और राजस्व दोनों को ध्यान में रखा जाएगा। जबकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी की टेलीफोन सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के केस में सिर्फ राजस्व के आधार पर गणना की जाएगी।

ट्राई ने यह भी सुझाव दिया है कि विलय और ट्रांसफर प्रक्रिया के लिए अभी दिए जाने वाले अधिकतम एक साल की अवधि में ढील दी जा सकती है। हालांकि, इसमें राहत तभी मिलेगी जब मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण या अन्य किसी मुकदमेबाजी में फंसकर देरी हुई हो। इतना ही नहीं नियमों के तहत बनाए गए प्रावधानों में किसी विशेष परिस्थिति में भी ढील दी जा सकती है। ट्राई का यह प्रस्ताव दूरसंचार विभाग की उस अपील पर आया है, जिसमें डॉट ने मई 2019 में विलय के लिए आसान और फास्ट-ट्रैक अप्रूवल जैसी व्यवस्था लाने की बात कही थी।
तेजी से घट रही कंपनियों की संख्या

ट्राई ने कहा है कि नई गाइडलाइन की सिफारिश दूरसंचार क्षेत्र में तेजी से घटती कंपनियों की संख्या को देखते हुए की गई है। एक दशक पहले जहां इस क्षेत्र में 12-14 सेवा प्रदाता कंपनियां थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर चार ऑपरेटर्स पर आ गई है। राष्ट्रीय डिजिटल संचार पॉलिसी तेजी से अप्रूवल देने और विलय प्रक्रिया में हो रही देरी को रिकॉर्ड में रखने की तैयारी कर रहा है। नियामक ने कहा कि अगर कोई मामला कानूनी पचड़ों की वजह से लटकता है, तो इस दौरान लगने वाले समय को विलय के लिए दिए गए एक साल के समय में से घटाया जा सकता है और कंपनियों को उतना अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

दूसंचार विभाग ने शुरू किया 5जी हैकाथन

दूरसंचार विभाग ने देश में 5जी प्रौद्योगिकी के अनुकूल समाधानों की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए ‘5जी हैकाथन’ शुरू किया है। विभाग ने कहा कि इस हैकाथन का आयोजन तीन चरणों में होगा, जिसके पहले चरण की शुरुआत 21 फरवरी को हुई। इसका आयोजन नीति आयोग, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, एमएसएमई, सी-डॉट, सीओएआई, इंडिया मोबाइल कांग्रेस, केपीएमजी, आईआईटी जैसे संस्थानों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर किया जा रहा है। इसके तीनों चरणों में प्रतिभागियों को 2.50 करोड़ रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। हैकाथन का समापन 26 अक्तूबर 2020 को होगा।

प्रतिस्पर्धा कानून के नियम बदलेगी सरकार

सरकार ने प्रतिस्पर्धा कानून के नियमों में बदलाव के लिए प्रस्ताव पेश कर दिए हैं। इसमें मौजूदा मामलों के समाधान के लिए भी लोगों को अधिकार दिए जाएंगे। नया ड्राफ्ट बिल प्रतिस्पर्धा कानून 2002 के नियमों में बदलाव करेगा, जिसे छह महीने तक विशेषज्ञों से सुझाव व अनुमोदनों के बाद जनता के बीच पेश किया गया है। इस बिल को कॉरपोरेट मंत्रालय ने तैयार किया है, जिसमें मामलों को तेजी से निपटाने के लिए कई प्रावधान किए हैं। इसके तहत कोई व्यक्ति लिखित में आवदेन प्रतिस्पर्धा आयोग के सामने पेश कर मामले के समाधान की मांग कर सकता है।
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